UP: ब्राह्मणों का सम्मान या उनका अपमान? मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव से पूछा सवाल

UP: ब्राह्मणों का सम्मान या उनका अपमान? मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव से पूछा सवाल

UP:  समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण सम्मेलन पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण समाज के प्रति रवैया विरोधाभासी रहा है. मनोज पांडेय ने कहा कि एक तरफ ब्राह्मण समाज के खिलाफ माहौल बनाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ चुनावी राजनीति के तहत उन्हें साधने की कोशिश की जाती है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर समाजवादी पार्टी की नीति क्या है- ब्राह्मणों का सम्मान या उनका अपमान?

पुरानी घटनाओं का भी किया जिक्र

कैबिनेट मंत्री ने अपने पोस्ट में उस पुराने विवाद का भी जिक्र किया जिसमें अखिलेश यादव ने एक पत्रकार से उसका सरनेम पूछा था. मनोज पांडेय ने आरोप लगाया कि पत्रकार द्वारा अपना सरनेम “मिश्रा” बताए जाने के बाद अखिलेश ने उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया था. उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रम कई सवाल खड़े करते हैं. उन्होंने समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समाज के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था. मनोज पांडेय ने कहा कि उस बयान पर न तो अखिलेश यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई और न ही पार्टी ने कोई खंडन या माफी जारी की. उनके मुताबिक इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पार्टी उस बयान से सहमत थी.

ब्राह्मण सम्मेलन पर साधा निशाना

मनोज पांडेय ने हाल ही में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जब ब्राह्मण समाज के नाम पर सम्मेलन आयोजित किया गया तो उसमें अखिलेश यादव स्वयं मौजूद नहीं रहे. उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज के सम्मान से जोड़ते हुए पूछा कि क्या ब्राह्मण केवल चुनाव के समय ही याद आते हैं. अपने पोस्ट में मंत्री ने कहा कि आज ब्राह्मण, पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज सभी राजनीतिक दलों से जवाब चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि समाज को जोड़ने के बजाय जातीय आधार पर बांटने की राजनीति की जा रही है.

मनोज पांडेय ने दावा किया कि जनता अब दिखावे और वास्तविकता के बीच का अंतर समझ चुकी है. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज को केवल वोट बैंक समझने की राजनीति ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकती. उनके अनुसार सनातन समाज सम्मान, स्वाभिमान और सामाजिक समरसता के मुद्दे पर एकजुट हो रहा है.

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