Jio का एआई रोडमैप जारी, अब कॉल, कारोबार और खेती तक पहुंचेगा AI
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भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा जियो, 22 भारतीय भाषाओं में सेवाओं की तैयारी
New Delhi: जियो की अगली बड़ी छलांग एआई में होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 49वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि भारत को एआई का निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना है। मुकेश अंबानी ने कहा कि इसी सोच के साथ रिलायंस इंटेलिजेंस को कंपनी के नए ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिलायंस इंटेलिजेंस का उद्देश्य उपभोक्ताओं, उद्यमों और सरकारों के लिए बड़े पैमाने पर एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म और सेवाओं का लाभकारी बिजनेस तैयार करना है। जियो के चेयरमैन आकाश एम. अंबानी ने रिलायंस इंटेलिजेंस की सेवाओं और एआई उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायंस की अपनी सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसकी पहली 120 मेगावाट क्षमता 2026 के अंत तक शुरू करने की योजना है। पूरी तरह चालू होने पर यह क्षमता दो लाख से अधिक एच100-इक्विवेलेंट जीपीयू तक बढ़ सकती है।
बहुभाषी एआई सेवाएं देने की तैयारी
आकाश अंबानी ने कहा, दुनिया के एआई प्लेटफॉर्म पहले अंग्रेजी में बनते हैं और बाद में उनका अनुवाद किया जाता है। इसके विपरीत, जियो भारतीय भाषाओं में नेटिव एआई बना रहा है। भारत का एआई भारतीय भाषा में बोलेगा। भारत के दिलों को जोड़ेगा। भारत की तस्वीर और तकदीर बदलेगा। रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में भरोसेमंद, किफायती और बहुभाषी एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है। इनमें जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू और जियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन सेवाओं का उद्देश्य किसानों, छात्रों, दुकानदारों, परिवारों और छोटे कारोबारियों तक एआई की उपयोगिता पहुंचाना है। जियो अपने नेटवर्क में भी एआई को सीधे जोड़ रहा है। कंपनी जियो कॉल एजेंट पर काम कर रही है। इसके जरिए हर जियो कॉल में, ग्राहक की अनुमति से, एआई एजेंट जुड़ सकेगा। यह कॉल को ट्रांसक्राइब कर सकेगा, उसका सार बना सकेगा और जरूरत पड़ने पर खाना ऑर्डर करने, कैब बुक करने, टेबल रिजर्व करने या मीटिंग तय करने जैसे काम भी कर सकेगा।
आकाश अंबानी ने जियो की पांचवीं प्रतिबद्धता को भारत की तकनीक को दुनिया तक ले जाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 5जी, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और एआई सेवाओं के लिए जियो में बनाया गया अपना डीप-टेक स्टैक अब चुनिंदा देशों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ इस्तेमाल के लिए तैयार है। रिलायंस ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ साझेदारियों का भी उल्लेख किया। कंपनी का कहना है कि इन साझेदारियों के जरिए वैश्विक तकनीक को भारतीय क्रियान्वयन, भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और भारत-प्रथम गवर्नेंस के साथ जोड़ा जाएगा। जियो ने जिस तरह डेटा को हर भारतीय के लिए किफायती बनाया था, रिलायंस इंटेलिजेंस अब एआई को आसान, भरोसेमंद और किफायती बनाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का दावा है कि जब एआई सुलभ होगा, तब भारत केवल एआई युग में भागीदार नहीं रहेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा।



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