America-Iran के बीच शांति समझौता, जानिए डील में किसने मारी बाजी?
America-Iran: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता तय समय से दो दिन पहले साइन हो चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डील को वर्चुअल तरीके से साइन किया. ट्रंप ने इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है. डील के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी दोबारा खोलने पर सहमति बन गई है, जिससे दुनिया के तेल कारोबार पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा फिलहाल टल गया. 14 पॉइंट शर्तों के साथ डील हुई है. लेकिन इसी के साथ एक सवाल जोर पकड़ रहा है. आखिर इस समझौते में असली फायदा किसे हुआ? कई रणनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि कागज पर भले दोनों पक्ष जीते दिख रहे हों, लेकिन सबसे बड़ा फायदा ईरान की झोली में गया है. ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई एक बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे हैं.
President Pezeshkian and his US counterpart Trump signed the MoU between Tehran and Washington digitally and remotely. pic.twitter.com/ratIJxoeLG
— Iran in India (@Iran_in_India) June 18, 2026
युद्ध फिलहाल रुक गया…
14 पॉइंट की डील में अमेरिका को सबसे बड़ी राहत यह मिली कि युद्ध फिलहाल रुक गया. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही नहीं रोकने का भरोसा दिया है. इसका मतलब है कि दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई फिर सामान्य होने जा रही है और तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आने का खतरा कम हो गया. इसके अलावा ईरान ने इस डील के जरिए परमाणु हथियार नहीं बनाने की शर्त मान ली है. हालांकि उसके परमाणु कार्यक्रम पर आखिरी फैसला अभी नहीं हुआ है. दोनों देश अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखेंगे और उसी दौरान स्थायी समझौते की कोशिश होगी. ट्रंप ने साफ कहा है कि यह ‘परफॉर्मेंस बेस्ड’ डील है. यानी अगर ईरान ने वादा नहीं निभाया तो दी गई रियायतें वापस भी ली जा सकती हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका इस डील के तहत ईरान को कोई सीधा नकद भुगतान नहीं करेगा.
ईरान को इस डील में क्या मिला?
इस डील में ईरान को जो छूट मिली है वही पूरी तस्वीर बदलती है. सबसे बड़ा फायदा ईरान के तेल कारोबार में मिला है. डील लागू होते ही ईरान को तेल और ईंधन बेचने की छूट मिलने लगी है. बैंकिंग, शिपिंग और इंश्योरेंस से जुड़े कई प्रतिबंधों में भी राहत का रास्ता खुल गया है. इससे ईरान की आर्थिक स्थिति फिर सुधरेगी और अभी तक प्रतिबंधों के कारण अलग-थलग पड़ा ईरान की दुनिया में फिर से अहमियत बढ़ेगी. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक अगर ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर तेल बेचता है तो उसे हर साल 60 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हो सकती है. ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि सिर्फ शुरुआती दो महीनों में ही उसे करीब 8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है. इतना ही नहीं, ईरान के पास पहले से 100 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल स्टोरेज में पड़ा है. इनमें करीब 60 मिलियन बैरल विदेशों में रखा हुआ है, जिसे अब तुरंत बाजार में बिक्री के लिए निकाला जा सकता है. अगर आगे स्थायी समझौता होता है तो विदेशों में फंसी करीब 100 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों तक पहुंच का रास्ता भी खुल सकता है. ईरानी मीडिया शुरुआती दौर में 12 अरब डॉलर जारी होने की उम्मीद जता रहा है. इसके साथ ही युद्ध से बर्बाद हुए ईरान को फिर से डेवलप करने के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव भी डील का हिस्सा बताया जा रहा है.



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