तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहे अन्नामलाई ने छोड़ी पार्टी, BJP अध्यक्ष ने मंजूर किया इस्तीफा
चेन्नई: तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार (05) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़ दी। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को इस्तीफा सौंपा। उन्होंने इसे मंजूर भी कर लिया है। अन्नामलाई ने 3 दिन पहले दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई भाजपा से बिना टकराव वाली सम्मानजनक विदाई चाहते थे।
इसके बाद वे तमिलनाडु में ‘राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन’ आधारित गैर-राजनीतिक आंदोलन शुरू करेंगे, जिसे जनभावनाओं के आधार पर बाद में राजनीतिक दल में बदला जा सकता है। अन्नामलाई 07 जून को अपने कोर समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं। युवा वोटबैंक में उनकी पकड़ को देखते हुए उनके अगले कदम पर राजनीतिक दलों की नजर है। यह भी चर्चा है कि RSS चाहता है कि अन्नामलाई सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहें।
अन्नामलाई और बीजेपी में अनबन के मिले थे संकेत
विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। फिर तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नामलाई ने चुनाव भी नहीं लड़ा था।
अन्नामलाई ने CBSE की तीन-भाषा नीति को मौजूदा सत्र से लागू करने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से इसे 2029-30 शैक्षणिक सत्र से लागू करने की मांग की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIADMK के साथ BJP के गठबंधन को लेकर अन्नामलाई सहमत नहीं थे। हालांकि बाद में उन्होंने NDA के लिए चुनाव प्रचार किया था।
भाजपा को कितना नुकसान
राज्य में युवाओं की पकड़ कमजोर होना: अन्नामलाई ने खुद को युवा, आक्रामक और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में स्थापित किया। सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है। युवाओं में भाजपा की पकड़ कमजोर हो सकती है।
तमिलनाडु में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा खोना: पिछले 4-5 साल में अन्नामलाई ही राज्य में भाजपा का मुख्य चेहरा रहे। उनके बाद वैसी लोकप्रियता वाला दूसरा नेता फिलहाल नहीं दिख रहा है।
DMK विरोधी वोटों का बिखराव: अन्नामलाई DMK के सबसे मुखर आलोचक रहे हैं। उनके हटने से विपक्षी राजनीति में भाजपा की धार कुछ कमजोर पड़ सकती है।
क्या सीमित भी रह सकता है नुकसान?
भाजपा का वोट पूरी तरह अन्नामलाई पर निर्भर नहीं: तमिलनाडु में भाजपा का एक हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आधार पर वोट करता है।
NDA गठबंधन सहारा दे सकता है: AIADMK जैसे सहयोगी दल साथ रहे तो भाजपा का संगठनात्मक नुकसान कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।



Post Comment