यूपी DGP राजीव कृष्ण पहुंचे मुख्यमंत्री आवास, सीएम योगी से की शिष्टाचार भेंट
लखनऊ: चार साल बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक नियुक्त राजीव कृष्णा ने रविवार (31 मई) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास कालीदास मार्ग पर शिष्टाचार भेंट की। डीजीपी की इस शिष्टाचार भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने उनको बधाई देने के साथ शुभकामना भी दी।
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्णा के पास मई 2025 से कार्यवाहक डीजीपी का चार्ज था। राजीव कृष्णा निदेशक सतर्कता अधिष्ठान भी हैं। मुकुल गोयल के मई 2022 से पद से हटने के बाद अब राजीव कृष्णा यूपी पुलिस के पूर्णकालिक डीजीपी हैं।
सीएम योगी के विश्वसनीय माने जाते हैं राजीव कृष्णा
राजीव कृष्णा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वसनीय अफसर माना जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संघ लोक सेवा आयोग से भेजे गए पैनल पर शासन स्तर पर गहन मंथन के बाद राजीव कृष्णा के नाम के प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दी। इस पद के लिए शासन स्तर पर तीन सीनियर आईपीएस अधिकारियों रेणुका मिश्रा (1990 बैच), पियूष आनंद (1990 बैच) और राजीव कृष्ण (1991 बैच) के नामों का एक पैनल तैयार करके भेजा गया था, जिसमें से राजीव कृष्णा के नाम पर मुहर लगी। उन्होंने पुलिस सेवा में विभिन्न पदों पर कार्य किया है और 2024 में पुलिस महानिदेशक के सर्वोच्च रैंक पर पदोन्नत हुए हैं।
राजीव कृष्णा को यूपी एटीएस के आधुनिकीकरण का भी श्रेय है। यूपी में सीरियल ब्लास्ट के बाद जब तत्कालीन मायावती सरकार ने एटीएस बनाने का ऐलान किया तो राजीव कृष्ण को एटीएस का डीआईजी बनाया गया। बतौर डीआईजी एटीएस राजीव कृष्ण ने यूपी एटीएस को आधुनिक संसाधनों और तकनीक से लैस किया।
एसपी के रूप में मिली थी पहली तैनाती
राजीव कृष्णा की एसपी के रूप में पहली तैनाती फिरोजाबाद जिले में मिली थी। वह 10 मई 1997 को सुहागनगरी के एसपी बनाए गए थे। फिरोजाबाद के बाद वह इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, नोएडा और आगरा के एसएसपी रहे।
राजीव कृष्णा अकेले आईपीएस अधिकारी हैं, जो दो बार लखनऊ पुलिस के एसएसपी रहे। 01 दिसंबर, 2006 को राजीव कृष्णा लखनऊ के एसएसपी बने और 16 मार्च, 2007 तक तैनात रहे। दूसरी बार उन्हें तब लखनऊ की कमान मिली जब लखनऊ, कानपुर, मेरठ समेत कई बड़े शहरों में डीआईजी व्यवस्था लागू हुई।



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