रिद्धिमा में कवि सम्मेलन ‘साहित्य सरिता’ का आयोजन
बरेली: एसआरएमएस रिद्धिमा के सभागार में रविवार (24 मई) को कवि सम्मेलन ‘साहित्य सरिता’ का आयोजन हुआ। इसमें बरेली से प्रसिद्ध कवि एवं शिक्षाविद डॉ. अनुज कुमार, डॉ. संजना साईमन, बदायूं से प्रभाकर सक्सेना, मुरादाबाद से मनोज वर्मा मनु, पूरनपुर से विकास आर्य, गाजियाबाद से सीमा सागर शर्मा ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
साहित्य सरिता का आरंभ बरेली की डॉ.संजना साइमन ने किया। उन्होंने ‘तेरी बुराई का ख्याल भी सिर्फ उन्हें ही आता है, तेरा आगे निकल जाना जिन्हें सताता है’, ‘जीने की थी चाहत जी न सकी, एक उलझन थी मन में, कभी कह नहीं सकी’ सुनाकर श्रोताओं को अपनी पीड़ा सुनाकर झकझोर दिया।
इन्होंने बांधा समां
पूरनपुर के विकास आर्य ‘स्वप्न’ ने ‘मन की मैं रिक्तता का भरण कर सकूं, द्वेष छल और कपट का मरण कर सकूं’, गाजियाबाद की सीमा सागर शर्मा ने ‘जो तेरी आंख से देखूं वो सपना गढ़ नहीं पायी, मैं सीढ़ी प्यार के मन्दिर की काहे चढ़ नहीं पायी’, बदायूं के प्रभाकर सक्सेना ने ‘कलयुग तेरे आज हैं देखे कितने गजब नजारे हैं, माँ-बाप को अब घर में दो रोटी के लाले हैं’, मुरादाबाद के मनोज वर्मा ‘मनु’ ने ‘भागीरथि सुरनदि सुरसरिता, सुरगिरि, हिमगिरी पर आच्छादित, गौमुख से प्रकटी जग तारिणी’ और ‘कितने सुख दुःख झेले होगें, हमको यह अहसास नहीं था, जब तक पास रही माँ उसमें, तब तक यूँ कुछ खास नहीं था’ सुनाकर भावनाओं के सागर में डुबोया।
डॉ. अनुज कुमार ने ‘कल्पना, संवेदना और क्षमता अवलोकन की, भाव, अभिव्यक्ति और भावना निरूपण की’ सुनाकर तालियां बटोरीं। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चैयरमेन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, देविशा मूर्ति, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. रीता शर्मा मौजूद रहे। मंच का संचालन डॉ. अनुज कुमार ने किया।



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