दिमाग को रखें कूल, हाइपरटेंशन जाएं भूल
- साइलेंट किलर के रूप में तेजी से बढ़ रही बीमारी है हाइपरटेंशन
बरेली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों की बात करें तो दुनिया की 30 फीसद से अधिक आबादी हाइपरटेंशन से प्रभावित है। हाइपरटेंशन को आमतौर पर उच्च रक्तचाप यानी हाई बीपी (High BP) भी कहते हैं, जिसमें ब्लड प्रेशर बढ़कर 140 पार हो जाता है। साइलेंट किलर के रूप में हाइपरटेंशन दुनिया भर में प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ मौतों का कारण बनता है। इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रति वर्ष 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे यानी विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष 2026 वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम ‘अपने रक्तचाप को नियंत्रित करेः नियमित रूप से रक्तचाप की जांच करें और इस जानलेवा बीमारी को हराएं’ (Controlling Hypertension Together: check your blood pressure regularly, defeat the silent killer) है। नियमित सिरदर्द, सांस की तकलीफ, चक्कर आना, अंगों का फड़कना, टेंशन और प्रतिकूल स्थितियों में नाक बहना जैसे इसके सामान्य से लक्षण हैं। ऐसे मामूली लक्षणों को ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
साइलेंट किलर के रूप में बढ़ रही बीमारी
इसी वजह से यह ‘साइलेंट किलर’ के रूप में तेजी से बढ़ रहा है। इसी वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे पर आज बात करते हैं एसआरएमएस मेडिकल कालेज के कार्डियोलाजिस्ट डॉ. अमरेश अग्रवाल और फिजीशियन डॉ. स्मिता गुप्ता से। ये दोनों कहते हैं कि एक बार हाइपरटेंशन हो जाने पर इससे छुटकारा मिलना मुश्किल है। ताउम्र इसकी दवाइयां लेनी पड़ती हैं, लेकिन नियमित दिनचर्या, संतुलित व पौष्टिक आहार और ब्लड प्रेशर का नियमित चेकअप से इसे काफी हद तक काबू में रखा जा सकता है।

डॉ. अमरेश के अनुसार, हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह 20 से 44 वर्ष की आयु के युवाओं के साथ ही किसी को भी हो सकता है। समय पर उपचार न होने पर यह हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। डॉ. स्मिता कहती हैं कि हाइपरटेंशन से एन्यूरिज्म, दिल की विफलता, अंग की खराबी, दृष्टि हानि, मैटाबोलिक सिंड्रोम और स्मृति से जुड़ी समस्याएं होना भी संभव हैं। डॉ. अमरेश कहते हैं कि हाइपरटेंशन किसी एक समस्या के कारण नहीं होता। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे आपका लाइफस्टाइल, पारिवारिक बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं। इसमें शुगर, ब्लड प्रेशर जैसी पारिवारिक बीमारी जैसे कई कारण ऐसे हैं, जिन पर हमारा नियंत्रण भी नहीं होता।
तेजी से बढ़ रहे हाइपरटेंशन के मरीज
डॉ. स्मिता कहती हैं कि एसआरएमएस की प्रतिदिन की ओपीडी में हाइपरटेंशन के बढ़ते मरीजों की संख्या इसका गवाह है। डॉ. अमरेश कहते हैं कि इसकी वजह असंतुलित खान-पान, खाने में पैक्ड फूड, हाई सॉल्ट डाइट और हाई कैलोरी डाइट का इस्तेमाल है। अतिरिक्त सॉल्ट और कैलोरी को शरीर से बाहर निकालने के लिए अधिकतर लोग एक्सरसाइज नहीं करते। अगर नियमित रूप से पैदल चला जाए या व्यायाम किया जाए तो पसीने के जरिए यह नमक और कैलोरी शरीर से निकल सकती हैं। AC में बैठने से भी शरीर से पसीना नहीं निकलता, जो हाइपरटेंशन को बढ़ाता है। इससे बचने के लिए पहला कदम अपनी दिनचर्या में बदलाव और संतुलित व पौष्टिक भोजन को शामिल करना है।

डॉ. स्मिता कहती हैं कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज या दिल की बीमारी का कोई पारिवारिक इतिहास न होने के बाद भी 30 साल की उम्र के बाद हर किसी को प्रति वर्ष स्वास्थ्य चेकअप करवाना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि बीमारी में थोड़ी राहत मिलने पर मरीज दवाई खाना छोड़ देते हैं। यह गंभीर हो सकता है। हाइपरटेंशन को सामान्य स्तर पर रखने के लिए बहुत जरूरी है कि आप नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही भोजन करें।
गर्भावस्था में हाइपरटेंशन जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवाः डॉ.शशिबाला
गर्भावस्था में हाइपरटेंशन सबसे अधिक खतरनाक होता है। यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। एसआरएमएस गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शशिबाला के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों से गर्भवती का ब्लड प्रेशर सामान्य से बढ़ जाता है। अगर महिला को पहले से ही बीपी की समस्या हो, तो यह हाइपरटेंशन का रूप ले लेता है। इससे गर्भपात, समय से पूर्व प्रसव, गर्भवती को अक्लेशिया समेत अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इससे जच्चा-बच्चा दोनों के जान पर खतरे की आशंका बढ़ जाती है।

हाइपरटेंशन मैटरनल मोर्टेलिटी का दूसरा बड़ा कारण है। अगर गर्भावस्था के दौरान चेहरे व पैरों पर सूजन, अधिक थकान या उलझन, तेज सिरदर्द, घबराहट या देखने में समस्या आए तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएं। यह हाइपरटेंशन के लक्षण हो सकते हैं।
हाइपरटेंशन के लक्षण
- सिर में तेज दर्द।
- अधिक थकान, उलझन, चिड़चिड़ापन, उल्टियां।
- अत्यधिक तनाव।
- गर्भावस्था के दौरान चेहरे व पैरों पर सूजन।
- देखने में समस्या या धुंधला दिखना।
- सीने में दर्द, सांस लेने में समस्या।
- दिल की धड़कनों में अनियमितता।
- यूरिन में खून आना।
- नाक से खून आना।
अनदेखी हो सकती घातक
- अंधापन या आंखें खराब होना।
- गुर्दे खराब होने की आशंका।
- दिल की बीमारियों व हार्ट अटैक का खतरा।
- ब्रेन हेमरेज का खतरा।
- खून की नलियां खराब होना।
- लकवे की आशंका।
- जा सकती है याददाश्त।
इन लोगों में खतरा अधिक
- अधिक उम्र के लोग।
- गर्भावस्था के दौरान।
- उच्च रक्तचाप का पारिवारिक इतिहास।
- अधिक वजन व मोटे व्यक्ति।
- शारीरिक कार्य व व्यायाम न करने वाले।
- धूम्रपान करने वाले लोगों में।
- अधिक शराब का सेवन करने वालों में।
- अधिक फैटी या अधिक नमक वाली डाइट लेने वालों में।
- अधिक कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित व्यक्तियों में।
- जरूरत से ज्यादा तनाव व मानसिक स्ट्रेस में रहने वालों में।
- मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में।
- पर्याप्त नींद न लेने वाले लोगों में।
ऐसे करें बचाव
- हल्का हाइपरटेंशन बिना दवाओं के भी ठीक हो सकता है। भोजन में नमक कम करने के साथ प्रतिदिन 45 मिनट वॉक करें। वॉक से 10 मिमी तक ब्लड प्रेशर कम होता है।
- वजन बढ़ने से सांस संबंधित समस्याएं (स्लीप एप्निया) भी पैदा होती हैं। यह हाइपरटेंशन को बढ़ाने का काम करती हैं। वजन घटाना हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- प्रतिदिन 30 मिनट नियमित एक्सरसाइज और 45 मिनट वॉक करें। वॉक करते समय 80 कदम प्रति मिनट की गति होने से ज्यादा फायदा। यह मूड भी दुरुस्त रखेगा और मधुमेह व हृदय रोगों के जोखिम को भी कम करेगा। मेडिटेशन व योग से भी रिलैक्स रख टेंशन को कम करें।
- लोअर बीपी, फास्टिंग शुगर, कमर की चौड़ाई, रैस्टिंग हार्ट रेट और कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को 80 से नीचे रखें।
- हाइपरटेंशन कम करने के लिए पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार लें। फल, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन करें। सैचुरेटेड फैट की मात्रा भोजन में बढ़ाएं। 80 ग्राम/80 एमएल कैलोरी से अधिक भोजन न लें। साल में 80 दिन रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट न खाएं। साल में 80 दिन धूप से विटामिन डी लें।
- हाइपरटेंशन कम करने के लिए न्यूनतम सोडियम का सेवन करना महत्वपूर्ण है। अधिक सोडियम खाने से शरीर द्रव को बनाना शुरू कर देता है। इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप में तेज वृद्धि होती है। नमक का सेवन कम करें।
- शराब के अत्यधिक सेवन से उच्च रक्तचाप सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा अत्यधिक शराब पीने से कुछ रक्तचाप दवाओं की प्रभावशीलता भी कम हो सकती है।
- तनाव भी हाइपरटेंशन को बढ़ाता है। यह अस्थायी रूप से रक्तचाप को बढ़ा सकता है। गैर जरूरी जिम्मेदारियों से दूर रहें ताकि तनाव कम हो सकें। ध्वनि प्रदूषण के 80 डीबी लेवल के संपर्क में आने से बचें।
- धूम्रपान करने से रक्तचाप या हाइपरटेंशन बढ़ता है। धूम्रपान न करें, इससे रक्तचाप सामान्य होता है। धूम्रपान छोड़ने से हृदय रोग का खतरा कम हो सकता है। पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में रहने से बचें।



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