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ग्रेवयार्ड इकोनॉमी से टेंपल इकोनॉमी तक, 9 वर्षों के विकास पर बोले मंत्री जयवीर सिंह
UP News: उत्तर प्रदेश में बीते 9 वर्षों के दौरान पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब “टेंपल इकोनॉमी” की ओर अग्रसर है, जहां आस्था, संस्कृति और पर्यटन मिलकर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल सोच का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं में आए बदलाव का परिणाम है। पहले जहां संसाधनों का उपयोग सीमित दृष्टिकोण के तहत होता था, वहीं अब धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक गलियारों और पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है।
पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, यूपी देश में अव्वल
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलने का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जिनमें करीब 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल हैं। घरेलू पर्यटन के मामले में यूपी देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं अयोध्या में राम मंदिर के बाद 2025 में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थों में ही करीब 116 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जो कुल पर्यटक संख्या का लगभग 90 प्रतिशत है।
मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन अब केवल परंपरा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र बन गए हैं। अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली और ब्रज का रंगोत्सव वैश्विक पहचान बना चुके हैं। वर्ष 2025 में अयोध्या दीपोत्सव के दौरान 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। इन आयोजनों से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, प्रसाद, फूल और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिल रहा है।
तीर्थ क्षेत्रों का व्यापक विकास
जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ने अयोध्या, ब्रज, विंध्याचल, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए विशेष परिषदों का गठन किया है। गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण भी किया गया है। साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1 लाख और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए 20 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, पर्यटकों की सुविधा के लिए आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट शुरू किए गए हैं, जबकि लखनऊ, प्रयागराज और कपिलवस्तु में हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कुशीनगर में बुद्ध थीम पार्क और चित्रकूट में पर्यटन सुविधा केंद्र जैसी परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
निवेश और रोजगार के नए अवसर
उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के तहत अब तक 36,681 करोड़ से अधिक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे करीब 5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयों को पंजीकरण भी जारी किया गया है। युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए शोध, प्रचार और मॉनिटरिंग कार्यों में 40,000 मासिक स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शहरों आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, झांसी और लखनऊ—में पर्यटन पुलिस तैनात की गई है। साथ ही 850 प्रशिक्षित गाइडों की नियुक्ति की गई है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
ग्रामीण और इको–टूरिज्म पर फोकस
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है और 2026-27 तक 50,000 होम-स्टे कमरे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है। 100 वर्ष से अधिक पुराने मंदिरों, मठों और धर्मशालाओं के जीर्णोद्धार की योजना चलाई जा रही है। साथ ही मेरठ, मुजफ्फरनगर और बरेली में एकीकृत पर्यटन विकास परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं। उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब केवल दर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास की मजबूत धुरी बन चुका है। “ग्रेवयार्ड इकोनॉमी” से “टेंपल इकोनॉमी” तक का यह सफर प्रदेश के बदलते स्वरूप और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है।