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Lucknow: 300 साल पुराने सिद्धनाथ धाम का विकास, सौंदर्यीकरण अंतिम चरण में

Lucknow: 300 साल पुराने सिद्धनाथ धाम का विकास, सौंदर्यीकरण अंतिम चरण में
  • लखनऊ के सिद्धनाथ मंदिर में 75% कार्य पूरा, रामायण कालीन आस्था का केंद्र सिद्धनाथ धाम

Lucknow: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा राजधानी लखनऊ के सदर क्षेत्र स्थित राज्य संरक्षित स्मारक बड़ा शिवाला श्री सिद्धनाथ मंदिर का कायाकल्प किया जा रहा है, जो अब अंतिम चरण में है। करीब एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इस परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। लखौरी ईंटों, सुर्खी और चूने से निर्मित यह मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है। अष्टभुजाकार मंडप पर स्थित इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान बाबा सिद्धनाथ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र हैं। यहां यात्री हॉल और यात्री निवास का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जहां श्रद्धालुओं के ठहरने और धार्मिक आयोजनों की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग पर इंटरलॉकिंग कार्य किया गया है, जिससे आवागमन सुगम हुआ है। पुरुष एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण भी लगभग समाप्ति कि ओर है।

श्रद्धालुओं के साथसाथ पर्यटकों के लिए भी बनेगा आकर्षण का केंद्र

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आस्था से अर्थव्यवस्था के मॉडल पर अल्पज्ञात पौराणिक स्थलों को विकसित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों का विकास न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को सशक्त करता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, छोटे व्यवसायों को बढ़ावा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का भी माध्यम बनता है। उन्होंने कहा, बड़ा शिवाला श्री सिद्धनाथ मंदिर का विकास ‘आस्था से अर्थ’ की इसी सोच का हिस्सा है। कार्य पूर्ण होने के बाद यह स्थल श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

मंदिर परिसर के समग्र सौंदर्यीकरण के तहत आकर्षक लाइटिंग व्यवस्था स्थापित की जा रही है, जिससे रात्रि के समय मंदिर की भव्यता और अधिक निखरेगी। परिसर में हरित क्षेत्र विकसित करते हुए पौधरोपण और लैंडस्केपिंग का कार्य किया जाएगा। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, साफ-सफाई के लिए बेहतर प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था तथा सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) भी लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त परिसर को व्यवस्थित एवं सुगठित रूप देने के लिए सौंदर्यपरक दीवारों और प्रवेश द्वार का भी निर्माण कराया जा रहा है।

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