नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पीटर एलबर्स ने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने मंगलवार (10 मार्च) को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। एलबर्स के जाने के बाद अब कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया अंतरिम तौर पर एयरलाइन के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।
तीन महीने पहले इंडिगो को भारी फ्लाइट ऑपरेशंस संकट का सामना करना पड़ा था। उस दौरान करीब 3 लाख यात्री फंसे रह गए थे, जिसके बाद एविएशन रेगुलेटर DGCA ने एयरलाइन पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया था।
आज ही जिम्मेदारी से मुक्त हुए एलबर्स
इंडिगो ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की आज हुई मीटिंग में CEO पीटर एलबर्स के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है। उन्हें आज बिजनेस ऑवर्स खत्म होने के बाद जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह राहुल भाटिया कंपनी के मामलों का मैनेजमेंट देखेंगे।

राहुल भाटिया को लिखे अपने इस्तीफे में पीटर एलबर्स ने पद छोड़ने के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने कंपनी से अपना नोटिस पीरियड खत्म करने की भी अपील की ताकि वे तत्काल प्रभाव से पद मुक्त हो सकें।
दिसंबर से ही दबाव में थे पीटर एलबर्स
पीटर एलबर्स ने सितंबर, 2022 में इंडिगो की कमान संभाली थी। पिछले साल दिसंबर में एयरलाइन को अपने इतिहास के सबसे खराब ऑपरेशनल संकट का सामना करना पड़ा था। सैकड़ों उड़ानें रद्द होने और देरी की वजह से एयरलाइन की साख पर बुरा असर पड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संकट की वजह से कंपनी को करीब ₹2,000 करोड़ का नुकसान भी हुआ था। तभी से एलबर्स पर इस्तीफे का दबाव था।
DGCA की सख्त कार्रवाई और भारी जुर्माना
दिसंबर में हुए फ्लाइट व्यवधान के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरती। इसके बाद इंडिगो पर ₹22.20 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई थी। जानकारों का मानना है कि इस घटना के बाद से ही बोर्ड और CEO के बीच तालमेल में कमी आने लगी थी।
कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है।
भारत समेत एशिया और दुनियाभर की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट हो सकता है।
भारतीय एयरलाइंस आगे किराया और बढ़ा सकती हैं
रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में हो रहे इजाफे को देखते हुए भारत की एविएशन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है।