उत्तर प्रदेश, एजुकेशन, राजनीति, हेल्थ

SRMS मेडिकल कॉलेज में डिकोडिंग चाइल्डहुड ‘अणु से आरोग्य तक’ पर कार्यशाला

SRMS मेडिकल कॉलेज में डिकोडिंग चाइल्डहुड ‘अणु से आरोग्य तक’ पर कार्यशाला

बरेली: दूसरे देशों की तुलना में अभी हम बच्चों के इलाज काफी पीछे हैं। इसके लिए नवजात बच्चों की पूरी जांच न होना और उनकी अनदेखी भी एक बड़ा कारण है। नवजात बच्चों की मृत्यु दर कम करने और उन्हें उचित उपचार मुहैया करने में सरकार की भूमिका तो महत्वपूर्ण है ही, लेकिन इसमें मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी भी कम नहीं। बीमारी से बचाव के लिए नवजात बच्चों की पूरी जांच और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मेडिकल कॉलेजों को आगे आना चाहिए।

यह बात एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति ने दो दिवसीय पीडियाट्रिक एवं नियोनेटल अपडेट कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि स्थापना के साथ ही एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज ने बीमारियों की रोकथाम पर फोकस किया। इसी के तहत नवजात बच्चों की संपूर्ण जांच सुनिश्चित की जाती है। उनके मां-बाप को इसकी जानकारी देकर उन्हें जागरूक भी किया जाता है।

अलखनंदा रिसोर्ट में हुई कार्यशाला

एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से अलखनंदा रिसोर्ट में दो दिवसीय (07-08 मार्च 2026) पीडियाट्रिक एवं नियोनेटल अपडेट कार्यशाला हुई। पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलाजी विभाग की ओर से शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे रजिस्ट्रेशन के साथ आरंभ हुई हुई कार्यशाला में डिकोडिंग चाइल्डहुड ‘अणु से आरोग्य तक’ थीम पर अत्याधुनिक जनेटिक्स, पीडियाट्रिक्स और नियोनेटोलॉजी से संबंधित विषयों पर देश के चुनिंदा बाल रोग विशेषज्ञों ने विमर्श किया और अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।

एसजीपीजीआई की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शुभा फड़के ने मॉलिक्यूलर मेडिसिन युग में बदलते निदान के प्रतिमान विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जेनेटिक मेडिसिन और मॉलिक्यूलर मेडिसिन को इलाज में महत्वपूर्ण बताया और इसके इस्तेमाल से सभी के बेहतर इलाज का जिक्र किया। विशेषकर नवजात बच्चों से संबंधित बीमारियों के उपचार में जेनेटिक मेडिसिन और मॉलिक्यूलर मेडिसिन की मदद लेने की सलाह दी।

इससे नवजात बच्चों की मृत्यु दर काफी हद तक कम होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बीमारी का इलाज महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे ज्यादा हम सबका ध्यान बीमारी की रोकथाम पर होना जरूरी है। तभी हम स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सक्षम होंगे। इसके लिए एमबीबीएस से ही जेनेटिक मेडिसिन और मॉलिक्यूलर मेडिसिन की जानकारी देना भविष्य के फायदेमंद साबित होगा।

डॉ. वंदना नेगी ने दी कार्यशाला थीम की जानकारी 

इससे पहले कार्यशाला की ऑर्गनाइजिंग को चेयरपर्सन ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ. वंदना नेगी ने अतिथियों सहित कार्यशाला में शामिल होने पहुंचे सभी लोगों का स्वागत किया और कार्यशाला की थीम की जानकारी दी। उन्होंने वर्कशॉप के जरिए चिकित्सकों की प्रैक्टिस और रिसर्च के बीच के गैप को दूर करने का प्रयास बताया। कहा कि बच्चों को बीमारियों से दूर रखने और उनके स्वास्थ्य के लिए इस तरह की वर्कशाप जरूरी हैं। कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत) डॉ. एमएस बुटोला ने कॉलेज की उपलब्धियों की जानकारी दी और मेडिकल कॉलेज में जल्द स्थापित होने वाली दो ट्रामा यूनिट के बारे में बताया। उद्घाटन सत्र के अंत में कार्यशाला के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अतुल कुमार ने सभी का आभार जताया और धन्यवाद ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. अर्चिता द्विवेदी ने किया।

इस अवसर पर एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर आदित्य मूर्ति, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह, डीन यूजी डॉ. बिंदु गर्ग, डॉ. प्रेम कुमार, कार्यशाला की ऑर्गनाइजिंग को चेयरपर्सन डॉ. संध्या चौहान, को सेक्रेटरी डॉ. गुंजन अग्रवाल और डॉ. अर्चिता द्विवेदी, साइंटिफिक सेक्रेटरी डॉ. सुरभि चंद्रा, ट्रेजरार डॉ. अमृत अग्रवाल एवं रूबी अहलावत, पीडियाट्रिक एवं नियोनेटोलाजी विभाग के सभी चिकित्सक व स्टाफ, सभी विभागाध्यक्ष, इंटर्न, पीजी एवं एमबीबीएस के विद्यार्थी मौजूद रहे।

बच्चों से संबंधित बीमारियों पर दिया व्याख्यान

कार्यशाला में कर्नल डॉ. राहुल सिन्हा ने बच्चों में मिर्गी के दौरे की वर्तमान स्थिति, कर्नल डॉ. आराधना द्विवेदी ने नियोनेटल जेनोमिक्स का नवजात के आरंभिक उपचार पर प्रभाव एवं क्लीनिकल प्रैक्टिस में एमपीएस टू का डायग्नोसिस, डॉ. सफल मोहम्मद ने आनुवांशिक हीमोलिटिक एनीमिया की जेनेटिक,  कर्नल डॉ. पुनीत सिंह ने आरटीए एवं ट्यूबलर डिसआर्डर एवं उनके जेनेटिक्स, कर्नल डॉ. आशीष सिमाल्ती ने पीआईसीयू के पर्सनलाइज केस में गंभीर इंफेक्शन एवं सेप्सिस पर व्याख्यान दिया। डॉ. विवेक कुमार ने बच्चों में हेरिटेबल कार्डियोवैस्कुलर डिजीज की जेनेटिक्स टेस्टिंग, डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने रेयर जेनेटिक डिजीज ‘पेंडोराज बॉक्स’ पर केस प्रेजेंटेशन दिया। डॉ. प्रज्ञा काफिले ने लाइसोसोमस स्टोरेज डिसआर्डर एवं गौचर डिजीज के बारे में व्याख्यान दिया।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *