Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों ने रजिस्ट्रार डॉ. भावना मिश्रा के तत्काल इस्तीफ़े और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि लाल बारादरी मामले में अवैध प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद की कार्यवाही ने परिसर में साम्प्रदायिक तनाव पैदा किया। छात्रों ने इस प्रकरण को जेएनयू में छात्र नेताओं के विरुद्ध की गई कार्रवाई और देशभर में छात्र असहमति के बढ़ते अपराधीकरण से जोड़ा है, तथा विश्वविद्यालयों में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लागू करने की आवश्यकता दोहराई है। बता दें कि बीती 22 फरवरी को लाल बारादरी के चारों ओर फेंसिंग की गई और एक बुलडोज़र तैनात किया गया। यह सब रमज़ान के महीने में किया गया। कोई लिखित कार्यपालक आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया। कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई। कोई परामर्श प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। छात्रों का कहना है कि रमज़ान के दौरान नमाज़ स्थल को बिना वैध आदेश सील करना सीधे तौर पर साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने वाला कदम था। प्रशासन ने दावा किया कि संरचना की स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन कोई वैज्ञानिक निरीक्षण रिपोर्ट या तकनीकी आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया। छात्रों का कहना है कि बिना प्रमाण खतरे का दावा करना और साथ ही वित्तीय जवाबदेही से बचना मनमानी है।
छात्रों में रोष
लगातार 48 घंटे छात्रों ने लिखित आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट की मांग की। संवाद के स्थान पर पुलिस तैनाती की गई और छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें मुस्लिम और दलित छात्र भी शामिल हैं। दूसरी ओर बाहरी साम्प्रदायिक तत्वों को परिसर में सक्रिय होने दिया गया। 26 फरवरी को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन देने हेतु शांतिपूर्ण मार्च निकाला गया, जिसे पुलिस ने बीच में रोक दिया। आइसा के समर ने कहा यह कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि कानून के शासन का प्रश्न है। रमज़ान के दौरान बिना लिखित आदेश कार्रवाई कर और छात्रों को निशाना बनाकर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ा गया। जेएनयू से लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय तक छात्र असहमति को अपराध की तरह लिया जा रहा है। अहमद रज़ा खान, एनएसयूआई, ने कहा पारदर्शिता की मांग पर दमन लोकतांत्रिक विश्वविद्यालयों को कमजोर करता है। महेंद्र यादव, एससीएस, ने कहा भेदभाव के विरुद्ध संस्थागत तंत्र के बिना छात्र सड़कों पर आने को मजबूर होते हैं। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लागू किया जाना चाहिए।
ये हैं छात्रों की मांगें
रजिस्ट्रार का तत्काल इस्तीफ़ा और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए; लाल बारादरी को सील करने से संबंधित लिखित आदेश सार्वजनिक किया जाए; स्वतंत्र संरचनात्मक निरीक्षण रिपोर्ट जारी की जाए; प्रधानमंत्री-उषा योजना के 5 करोड़ रुपये का विस्तृत लेखा-जोखा दिया जाए; लखनऊ विश्वविद्यालय सहित देशभर में छात्रों के विरुद्ध दर्ज सभी मुकदमे, विशेषकर जेएनयू में छात्र नेताओं पर की गई कार्रवाई, वापस ली जाए; छात्र असहमति के अपराधीकरण को रोका जाए; यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को सभी विश्वविद्यालयों में पूर्ण रूप से लागू किया जाए; छात्र प्रतिनिधियों सहित स्वतंत्र समीक्षा समिति गठित की जाए; तथा यदि कोई तात्कालिक संरचनात्मक खतरा सिद्ध न हो तो लाल बारादरी को सुरक्षा उपायों के साथ पुनः खोला जाए। छात्रों ने कहा कि यह संघर्ष शांतिपूर्ण, कानूनी और संवैधानिक तरीकों से जारी रहेगा जब तक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती।