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Shailendra Singh
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गड़बड़ी मिली तो SIR रद्द करेंगे, बिहार पर जो फैसला देंगे, वही पूरे देश पर लागू होगा: SC
नई दिल्ली: बिहार में SIR (वोटर वेरिफिकेशन) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (15 सितंबर) को सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि चुनाव आयोग प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा है। नियमों की अनदेखी हो रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम यह मानकर चलेंगे कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारियों को जानता है। अगर कोई गड़बड़ी हो रही है, तो हम इसको देखेंगे। अगर बिहार में SIR के दौरान चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली में कोई अवैधता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है।
जस्टिस सूर्यकांत शर्मा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि वह बिहार SIR पर टुकड़ों में राय नहीं दे सकता। उसका अंतिम फैसला केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में SIR पर लागू होगा। मामले पर 07 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।
कोर्ट रूम में हुई बहस
- प्रशांत भूषण (ADR की ओर से): चुनाव आयोग अपनी ही प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा, सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की सभी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में होनी चाहिए।
- वृंदा ग्रोवर (वोटर ग्रुप्स की ओर से): नागरिकों को “गैरकानूनी SIR” का खामियाजा क्यों भुगतना चाहिए? नियमों और EC के मैनुअल का उल्लंघन हो रहा है, केवल 30% आपत्तियों और दावों की एंट्री अपडेट की गई है।
- अश्विनी उपाध्याय (याचिकाकर्ता): आधार न तो नागरिकता का प्रमाण है और न ही पहचान का अंतिम दस्तावेज, इसे अन्य 11 दस्तावेजों के बराबर नहीं माना जा सकता।
- वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी (EC की ओर से): आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहा है और सभी आपत्तियों पर सुनवाई हो रही है। हर नाम-जोड़ने या हटाने का विवरण सार्वजनिक करने से लोगों की प्राइवेसी प्रभावित होगी।
- वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन (EC की ओर से): चुनाव आयोग ने आधार को 12वें पहचान दस्तावेज़ के रूप में शामिल किया है। इसके लिए 10 सितंबर को बैठक भी हुई।
- जस्टिस सूर्यकांत: चुनाव आयोग कानून जानता है और वह भारतीय नागरिक और विदेशी घुसपैठियों में फर्क करने में भी सक्षम है। मतदाता सूची 01 अक्टूबर को प्रकाशित हो जाएगी, लेकिन कोर्ट की निगरानी में यह प्रक्रिया चल रही है, इसलिए किसी भी गड़बड़ी को सुधारा जाएगा।
- आठ सितंबर को हुई थी सुनवाई
इससे पहले 08 सितंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “आधार पहचान का प्रमाण पत्र है, नागरिकता का नहीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि वोटर की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर माना जाए। बिहार SIR के लिए फिलहाल 11 निर्धारित दस्तावेज हैं, जिन्हें मतदाताओं को अपने फॉर्म के साथ जमा करना होता है।”
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने ये भी कहा था, “आधार कार्ड को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो आयोग इसकी जांच कराए। कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे। केवल वास्तविक नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति होगी। जो लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दावा कर रहे हैं, उन्हें मतदाता सूची से बाहर रखा जाएगा।”



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