El Nino से निपटने के लिए मंत्रालयों और राज्यों को PMO ने दिए जरूरी निर्देश

El Nino से निपटने के लिए मंत्रालयों और राज्यों को PMO ने दिए जरूरी निर्देश

El Nino: खरीफ फसल के सीजन और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर अल-नीनो के संभावित असर को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्र की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक में अल-नीनो से निपटने के लिए मंत्रालयों की तैयारियों की समीक्षा की गई और जरूरी निर्देश दिए गए। बैठक में कृषि, बिजली, सहकारिता, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, और मौसम विभाग (आईएमडी) समेत 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मौसम विभाग के निदेशक ने जून से लेकर सात जुलाई तक देश में हुई बारिश का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि गुजरात समेत कुछ राज्यों में मानसून लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन जुलाई के पहले हफ्ते में हुई अच्छी बारिश से देश में बारिश की कमी घटकर -12 फीसदी रह गई है।

स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है क्योंकि अकेले जुलाई महीने में ही मानसून सीजन की 30 फीसदी से अधिक बारिश होती है। कृषि सचिव ने खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वर्षा, जलाशयों के जल स्तर, फसलों की बुआई, खाद-बीज की उपलब्धता इत्यादि की निगरानी के लिए राज्यों के साथ फसल मौसम निगरानी समूह की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं। 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आपातकालीन योजनाएं अपडेट कर दी गई हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों को मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी की गई हैं।

मानसून का आकलन कर कदम उठाएं

प्रधान सचिव मिश्र ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे राज्यों के साथ मिलकर आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने कहा कि देरी से आए मानसून का संवेदनशील जिलों पर क्या असर पड़ा है, इसका तुरंत आकलन कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, जलाशयों के पानी का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

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