अहमदाबाद में भगवान जगन्‍नाथ की रथयात्रा, CM-उप मुख्यमंत्री ने रथ के आगे लगाई झाड़ू

अहमदाबाद में भगवान जगन्‍नाथ की रथयात्रा, CM-उप मुख्यमंत्री ने रथ के आगे लगाई झाड़ू

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जा रही है। यात्रा में संदेशों वाली झांकियां भी शामिल हैं। वहीं, इस बार हाथियों को पैर में जंजीरों से बांधकर लाया गया और खड़िया पोल पर आते ही लोगों को सड़क से हटा दिया गया। यहां पिछले साल तीन हाथी बेकाबू हो गए थे।

भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा तीनों रथों पर विराजमान

इससे पहले जामालपुर जगन्नाथ मंदिर में सुबह 4 बजे मंगला आरती हुई, जिसमें अमित शाह शामिल हुए। सुबह 7 बजे रथयात्रा निकली। सीएम भूपेंद्र पटेल और डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने सोने की झाड़ू से रथ के आगे सफाई कर यात्रा को रवाना किया। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सपरिवार पूजा-अर्चना की।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर तीनों रथ पहुंचे

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर तीनों रथ पहुंच गए हैं। भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ रथयात्रा से पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर खड़ा कर दिया गया है। थोड़ी देर में मंगला आरती होगी।

ओडिसी डांसर बोलीं- महाप्रभु बाहर आएंगे तो बारिश रुक जाएगी

रथयात्रा की शुरुआत में ओडिसी डांस करने वाली कलाकार ने कहा- मैं हर साल भगवान जगन्नाथ के सामने ओडिसी नृत्य करती हूं। ओडिसी भगवान का फेवरेट डांस माना जाता है, इसलिए हर बार मुझे यहां प्रस्तुति देने का सौभाग्य मिलता है। मुझे विश्वास है कि आज जब महाप्रभु भक्तों को दर्शन देने बाहर आएंगे, तब बारिश भी थम जाएगी।

बारिश के बीच पुरी में ओडिसी डांस कर रहे कलाकार

तेज बारिश के बावजूद पुरी रथयात्रा में शामिल होने पहुंच रहे श्रद्धालु

सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करेंगे पुरी गजपति

रथयात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव तीनों रथों की पूजा करेंगे। वे भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं। इसके बाद वे सोने की झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करेंगे। फिर चंदन और सुगंधित जल का छिड़काव करेंगे। इस रस्म को ‘छेरा पहरा’ कहा जाता है।

रथयात्रा से पहले यह रस्म हर साल होती है। यह परंपरा बताती है कि भगवान के सामने राजा और आम इंसान सभी समान हैं। इसलिए गजपति महाराजा भी खुद को भगवान का सेवक मानकर यह सेवा करते हैं।

सबसे पहले बलभद्र, सबसे आखिर में जगन्नाथ का रथ

रथयात्रा में तीनों रथ एक क्रम से निकलते हैं। सबसे पहले भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र का तालध्वज रथ चलता है। इसके बाद बहन सुभद्रा का दर्पदलन रथ निकलता है। सबसे आखिर में भगवान जगन्नाथ अपने नंदीघोष रथ पर सवार होकर यात्रा शुरू करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बड़े भाई होने के कारण बलभद्र सबसे पहले मार्ग दिखाते हैं, उनके पीछे बहन सुभद्रा चलती हैं और अंत में भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। यही क्रम हर साल रथयात्रा और बहुदा यात्रा, दोनों में निभाया जाता है।

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