दिल्ली, देश-दुनिया, राजनीति

दिल्ली शराब नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया बरी, जांच एजेंसी ने 6 घंटे बाद ही हाईकोर्ट में अपील की

दिल्ली शराब नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया बरी, जांच एजेंसी ने 6 घंटे बाद ही हाईकोर्ट में अपील की

नई दिल्‍ली: शराब घोटाला केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्‍टी सीएम मनीष सिसोदिया को केंद्रीय जांच ब्‍यूरो (CBI) केस में बरी कर दिया है। अदालत ने शुक्रवार को कहा कि दोनों के खिलाफ सबूत नहीं है, आरोप साबित नहीं होता। सीबीआई ने साजिश गढ़ने का प्रयास किया, लेकिन उसका सिद्धांत ठोस सबूतों की जगह अनुमान पर था।

सीबीआई ने इस मामले में कुल 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सभी के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार करते हुए सभी को बरी कर दिया। जांच एजेंसी ने फैसले के करीब 6 घंटे बाद दिल्ली हाईकोर्ट में अपील कर दी।

मीडिया के सामने भावुक हुए केजरीवाल

वहीं, बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। इन्होंने झूठा केस लगाया। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं।

वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा, हमें एक बार फिर गर्व हो रहा हैं अपने संविधान पर और बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है।

CBI ने कहा- फौरन दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करेंगे

आबकारी नीति मामले में केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी किए जाने पर सीबीआई ने कहा- जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया या पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ तुरंत दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

राउज एवेन्यू कोर्ट की 4 बड़ी बातें

राउज एवेन्‍यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी किया। उन्‍होंने कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। चार्जशीट में विरोधाभास हैं, जो कथित साजिश (आरोपों) की पूरी थ्योरी को कमजोर करते हैं। अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी (आईओ) के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।

आबकारी नीति पर: आबकारी नीति के निर्माण में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी। अभियोजन पक्ष (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच पर खरा नहीं उतरता। CBI ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसका सिद्धांत ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित था।

केजरीवाल पर: केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।

मुख्य आरोपी कुलदीप पर: मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को बरी करते हुए कहा कि हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी।

मनीष सिसोदिया पर: सिसोदिया पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन अदालत ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई।

किसको पॉलिटिकल राहत, किसे झटका?

अगस्त, 2022 में CBI की चार्जशीट के आधार पर ED ने भी इस मामले में केस दर्ज किया था। ED के मामले भी अभी सुनवाई जारी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि CBI मामले में केजरीवाल समेत अन्य लोगों के बरी होने के कारण ये सभी ED मामले में भी बरी हो सकते हैं। इस फैसले के बाद ED का मामला अब कमजोर पड़ गया है।

कानूनी तौर पर आगे क्या?

ऐसे मामलों में जांच एजेंसी दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख करती हैं। सीबीआई अब राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करेगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *