लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) अंसल प्रबंधक के खिलाफ गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एलडीए अधिकारियों को मामले में सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ एलडीए एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल में जाएगा। यहां पर राहत नहीं मिलेगी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएगा। एक हफ्ते के अंदर यह कार्रवाई पूरी की जाएगी।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि NCLT द्वारा अंसल साइंस सिटी मामले में आदेश पूरी तरीके से लखनऊ विकास प्राधिकरण के खिलाफ है। एलडीए या फिर किसी भी सरकारी विभाग को ना तो इस मामले में कोई पक्ष लिया गया। ना ही कोई नोटिस दी गई। एलडीए का अंसल पर जमीनों का करीब 450 करोड़ रुपये बकाया है, उसको भी संज्ञान में नहीं लिया। ऐसे में एनसीएलटी का निर्णय एलडीए को मान्य नहीं है। इसके खिलाफ अपीलीय ट्रिब्यूनल में जाएगा और एनसीएलटी को भी बताया कि अंसल पर उसकी कितनी देनदारी है।
मुख्यमंत्री योगी ने जताई नाराजगी
इस आदेश के खिलाफ लखनऊ विकास प्राधिकरण NCLET में अपील करेगी। पूरे मामले पर मुख्यमंत्री ने अनियमित और नियमावली के उल्लंघन पर रोष प्रकट किया। सीएम ने मामले के गंभीरता को समझते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण को एक हफ्ते के अंदर FIR करने और अपने स्तर पर जांच करके शासन को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कई लोगों ने ये शिकायत की हैं कि अंसल ने उन जमीनों को भी बेच दिया, जिसको उसने खरीदा तक नहीं हैं। एलडीए में बंधक, ग्रीन बेल्ट और ग्राम समाज की जमीन भी बेच दी है। यह धोखाधड़ी है। एलडीए के पास कंपनी ने 411 एकड़ जमीन बंधक रखी थी, इसमें से कितनी जमीन बेची है और कितनी बची है, इसकी जांच की जाएगी।
अंसल ने बेच दी ग्राम समाज की 219.35 एकड़ जमीन
अंसल एपीआई बिल्डर ने ग्राम समाज की 219.35 एकड़ जमीन बेच दी है। बिल्डर ने जमीन तो बेची, लेकिन इसका 203.98 करोड़ रुपये आज तक जमा नहीं किया। वहीं, रेरा ने वसूली के लिए आरसी जारी की थी। आरसी की रिकवरी नहीं हो पायी। करीब 60 करोड़ रुपये की आरसी जिला प्रशासन के पास फाइलों में दबी है। अधिकारियों ने इसकी भी वसूली नहीं कराई, जिससे जनता का यह पैसा भी फंस गया है।
खरीददारों को राहत देने के लिए हर स्तर तक जाएंगे
एलडीए वीसी ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने निर्देश दिए हैं कि कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और एनसीएलटी के आदेश से खिलाफ जिस स्तर से खरीददारों को राहत मिल सकती है, उस स्तर तक पैरवी की जाए।
अंसल को दिवालिया घोषित किया
राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) दिल्ली ने 25 फरवरी को लखनऊ में अंसल को दिवालिया घोषित कर दिया था। कंपनी पर एलडीए का 450 करोड़ रुपये बकाया है। दिवालिया घोषित होने के बाद एलडीए का पैसा भी फंस गया है। एनसीएलटी ने अंसल कंपनी के बोर्ड को भी भंग कर दिया है। ऐसे में टाउनशिप की जमीन अंसल के अधिकार में नहीं रही। अब एनसीएलटी की ओर से नियुक्त किया गया रिसीवर ही उसको लेकर निर्णय लेगा।