नई दिल्ली: इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में आए भूचाल के बीच भारत सरकार ने बड़ी बात कही है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दामों में फिलहाल कोई वृद्धि नहीं होगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तेल विपणन कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के पास पिछले महीनों में कमाए गए ‘बंपर मुनाफे’ के कारण अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को झेलने की पर्याप्त वित्तीय क्षमता है।
शनिवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹60 का इजाफा किया गया। प्रमुख शहरों में 14.2 किलोग्राम के गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर के नए दाम।
दिल्ली: ₹913 (पहले ₹853)
मुंबई: ₹912.50
कोलकाता: ₹939
चेन्नई: ₹928.50
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी: 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिलने वाली ₹300 की सब्सिडी के बाद, अब उन्हें एक सिलेंडर के लिए ₹613 चुकाने होंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: क्यों बढ़ीं कीमतें?
कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह ईरान-इजरायल युद्ध और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। भारत अपनी जरूरत का 40% प्राकृतिक गैस और 85-90% आयातित एलपीजी इसी समुद्री मार्ग से मंगाता है। मार्ग ठप होने से सप्लाई चेन चरमरा गई है।
28 फरवरी से अब तक कच्चे तेल (WTI) की कीमतों में 35.63% की ऐतिहासिक साप्ताहिक वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड $92.69 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। एशियाई बाजारों में एलएनजी की कीमतें $25.40 प्रति MMBtu तक पहुंच गई हैं, जो 3 साल का उच्चतम स्तर है।
पेट्रोल-डीजल पर राहत क्यों?
सरकारी सूत्रों ने राहत की खबर देते हुए बताया कि तेल कंपनियों ने इस साल की शुरुआत में भारी मुनाफा कमाया था, जो वर्तमान घाटे को समायोजित (Adjust) करने में सक्षम है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर बनी हुई हैं। सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना है।
सरकार की ‘इमरजेंसी पावर’ का इस्तेमाल
ईंधन की कमी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए घरेलू रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी क्षमता बढ़ाकर एलपीजी के उत्पादन में तेजी लाएं। लक्ष्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद देश के भीतर ईंधन की निरंतर आपूर्ति बनी रहे।