13 साल से ऊपर की बेटियों से बात करिए, कहीं गलत संगत में न फंस जाएं: राज्‍यपाल

13 साल से ऊपर की बेटियों से बात करिए, कहीं गलत संगत में न फंस जाएं: राज्‍यपाल

लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बुधवार को ख्वाजा चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में 1246 छात्रों को डिग्री और 110 मेधावियों को 125 मेडल दिए गए। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि 13 साल से ज्यादा उम्र की बेटियों से ज्यादा बात करें। उनका ध्यान रखें, जिससे वे किसी गलत संगति में न फंसें। राज्यपाल ने राजस्थान की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 13 साल की बच्ची के साथ कई दिनों तक दुष्कर्म होता रहा। लेकिन, होटल में मौजूद लोगों ने अपना सामाजिक दायित्व नहीं निभाया।

समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, 10 अत्याधुनिक फार्मेसी प्रयोगशालाओं, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए दो लिफ्ट, तीन विशेष शौचालय, बाल वाटिका, अतिथि गृह के पांच नवीनीकृत कक्ष और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम का लोकार्पण किया। साथ ही शिक्षकों द्वारा लिखी गई 11 पुस्तकों का भी विमोचन किया।

राज्यपाल ने की सुधांशु त्रिवेदी की सराहना

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि यह भाषा विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह है और उन्हें इनमें से सात दीक्षांत समारोहों में शामिल होने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज डिग्री और मेडल प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए यह गर्व का क्षण है।

राज्यपाल ने कहा कि इस बार उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्य अतिथि डॉ. सुधांशु त्रिवेदी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, सुधांशु त्रिवेदी अपनी विलक्षण प्रतिभा और तार्किक अभिव्यक्ति के लिए जाने जाते हैं।

राज्यपाल बोलीं- 13 वर्षीय बच्ची के साथ कई दिनों तक दुष्कर्म होता रहा

राज्यपाल ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 13 वर्षीय बच्ची के साथ कई दिनों तक दुष्कर्म होता रहा, लेकिन आसपास मौजूद लोगों ने अपना सामाजिक दायित्व नहीं निभाया। वहीं उन्होंने एक प्रेरक उदाहरण भी साझा किया।

उन्होंने कहा कि एक परिवार ने एक माह की बच्ची को झाड़ियों में छोड़ दिया था, लेकिन एक सब्जी विक्रेता ने उसे अपनाकर पढ़ाया-लिखाया और आज वह बच्ची आईएएस अधिकारी है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे सकारात्मक उदाहरण भी मौजूद हैं, जिनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।

भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा पांडुलिपि भंडार

राज्यपाल ने कहा कि हम सभी जानते है कि भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा पांडुलिपि भंडार है। ये हमारे पूर्वजों के ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा की अमूल्य धरोहर है। किसी को याद नहीं आया पर मोदी जी को याद आया। पीएम मोदी में देशवासियों से आग्रह किया है कि किसी के पास कोई पांडुलिपि हो तो उसे एप पर साझा करें। अकेले संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में 1 लाख 10 हजार पांडुलिपि है। आगरा यूनिवर्सिटी में भी पांडुलिपि है, मैंने देखा है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाना

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाना भी है। उन्होंने कहा कि यदि समाज में करुणा और संवेदना होती तो बेटियों के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं न होतीं। आज कहीं पति की हत्या हो रही है तो कहीं पत्नी की। ऐसे हालात बताते हैं कि समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है।

शिक्षा के लिए लोग अमेरिका जाते हैं, लेकिन दीक्षा के लिए भारत आते हैं

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वह स्वयं लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्हें पता है कि पहले प्रदेश में उच्च शिक्षा की क्या स्थिति थी और बीच के वर्षों में उसमें गिरावट आई, लेकिन अब उच्च शिक्षा फिर अपने पुराने गौरव की ओर लौट रही है।

भारतीय भाषाओं का वैश्विक प्रभाव

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय में अरबी और फारसी जैसी भाषाओं की पढ़ाई होती है, लेकिन भारतीय भाषाओं का प्रभाव दुनिया की कई भाषाओं और संस्कृतियों में स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया की संस्कृति में भी भारतीय परंपरा की झलक मिलती है। भारत की भाषाई विरासत बेहद समृद्ध रही है।

तुलसीदास के शब्द-सामर्थ्य का उल्लेख

साहित्य की समृद्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शेक्सपियर ने अपने साहित्य में करीब 30 से 40 हजार शब्दों का प्रयोग किया, जबकि गोस्वामी तुलसीदास ने अकेले रामचरितमानस में लगभग 1.40 लाख शब्दों का प्रयोग किया।

दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। शिक्षा विश्वविद्यालय से मिलती है, जबकि दीक्षा संस्कारों से प्राप्त होती है और उसके लिए गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक होता है।

कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता यह दीक्षांत है, शिक्षांत नहीं

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता यह दीक्षांत है, शिक्षांत नहीं। सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है।

शिक्षा व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा स्वीकार्य नहीं हो सकती, जो पढ़े-लिखे डॉक्टरों को हत्यारा बना दे, केमिकल बम बनाना सिखाए, युवाओं के हाथों में पत्थर थमा दे या उन्हें मातृभूमि को नमन करने से रोके।

टॉप-10 मेडलिस्ट

  • मो. अफ्फान- 3 गोल्ड मेडल
  • सौम्या मिश्रा- 3 गोल्ड मेडल
  • आकाशी यादव- 3 गोल्ड मेडल
  • अमन विकास कुमार तिवारी- 2 गोल्ड मेडल
  • माहे नूर- 2 गोल्ड मेडल
  • शुभम सिंह- 2 गोल्ड मेडल
  • अब्दुल करीम- 2 गोल्ड मेडल
  • श्रद्धा गुप्त- 2 गोल्ड मेडल
  • आकांक्षा निगम- 2 गोल्ड मेडल
  • राहुल राजभर- 2 गोल्ड मेडल

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