लखनऊ मेयर के प्रशासनिक-वित्तीय अधिकार फ्रीज, हाईकोर्ट ने इस मामले में की कार्रवाई

लखनऊ मेयर के प्रशासनिक-वित्तीय अधिकार फ्रीज, हाईकोर्ट ने इस मामले में की कार्रवाई

लखनऊ: लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई निर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाए जाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुरुवार को की। मामला लखनऊ के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से जुड़ा है। सत्र अदालत ने ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किया था। हालांकि, उन्हें निर्वाचित घोषित हुए पांच महीने बीत जाने के बाद भी अब तक शपथ नहीं दिलाई गई।

इस मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोर्ट द्वारा निर्वाचित घोषित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज रहेंगे।

समझिए पूरा मामला

लखनऊ नगरीय निकाय चुनाव-2023 के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। मतगणना में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 और ललित तिवारी को 3,298 वोट मिले थे। इस आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचित घोषित कर दिया गया था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

इसमें आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन प्रपत्रों में कुछ जरूरी जानकारियां नहीं दी थीं। ये जानकारियां देना कानूनन जरूरी था। याचिका में यह भी कहा गया था कि नामांकन प्रक्रिया में की गई यह चूक चुनावी नियमों का उल्लंघन है। इसे कदाचार की श्रेणी में माना जाना चाहिए। इसी आधार पर प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। साथ ही चुनाव परिणाम निरस्त करने की मांग की गई थी।

पांच महीने पहले रद्द हुआ था निर्वाचन

नगर निगम पार्षदी को लेकर वार्ड-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) में उठा विवाद 13 मई, 2023 को लखनऊ के अपर जिला जज की अदालत तक पहुंचा था। करीब ढाई साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने निर्वाचन के समय दाखिल एफिडेविट, शपथ पत्र और निर्वाचन फार्म की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों और दलीलें देखीं। कोर्ट ने पाया कि नामांकन के दौरान आवश्यक जानकारी न देना गंभीर अनियमितता है। इससे चुनाव की वैधता प्रभावित होती है। इसी आधार पर कोर्ट ने प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया था। साथ ही ललित तिवारी को वार्ड-73 से निर्वाचित घोषित कर दिया था।

पार्षद ललित किशोर ने बताया कि निर्वाचित होने के बावजूद उनको शपथ नहीं दिलाई गई। इस संबंध में उन्होंने न्यायाधिकरण को बताया कि 19 दिसंबर 2025 को उनको निर्वाचित घोषित किया था, लेकिन शपथ नहीं दिलाई गई है। इस बीच पूर्व निर्वाचित सदस्य अभी भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

12 मई को फिर दिया आदेश

हालांकि, 12 मई को एक बार फिर हाईकोर्ट ने ललित तिवारी को एक सप्ताह में शपथ दिलाने का आदेश दिया था। इस पर प्रदीप कुमार शुक्ला की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने रद्द किया था। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने लखनऊ मेयर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए थे।

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