AAP के प्रदेशव्यापी जनसंघर्ष के बाद योगी सरकार बैकफुट पर, प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था खत्म

AAP के प्रदेशव्यापी जनसंघर्ष के बाद योगी सरकार बैकफुट पर, प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था खत्म

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था के खिलाफ आम आदमी पार्टी द्वारा चलाए गए चरणबद्ध जन आंदोलन, प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन और जनता के सड़कों पर उतरकर किए गए व्यापक संघर्ष के बाद आखिरकार योगी सरकार को बैक फुट पर आना पड़ा और प्रीपेड स्मार्ट मीटर की व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लेना पड़ा। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के सशक्त आंदोलन और प्रदेश की 25 करोड़ जनता के संयुक्त संघर्ष की ऐतिहासिक जीत है।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद संजय सिंह के आवाहन पर पार्टी ने पहले दिन से ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया। 28 अप्रैल को संजय सिंह ने प्रेस वार्ता के माध्यम से इस व्यवस्था को “खुली लूट” बताते हुए प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया था। इसके बाद 3 मई को प्रदेश के सभी जनपदों में आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जनता के साथ सड़कों पर उतरे और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कई जिलों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन लगातार तेज होता गया।

अभी यह अधूरी जीत है: संजय सिंह

इस मौके पर संजय सिंह ने एक ट्वीट जारी करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश और यूपी की जनता के संघर्ष को सलाम, जिसके सामने भाजपा की तानाशाही सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता की जेब पर डाका डालने की भाजपाई साज़िश को बड़ा झटका लगा है। आप सांसद ने ट्वीट के माध्यम से यह भी कहा कि अभी यह अधूरी जीत है, मीटर को प्रीपेड से पोस्टपेड करना स्थायी समाधान नहीं है। जब तक उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर के जरिए जनता का शोषण पूरी तरह बंद नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

संजय सिंह ने इससे पहले कहा था कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर ‘स्मार्ट चीटर’ बनकर जनता को लूट रहे थे और इनकी रफ्तार मिल्खा सिंह से भी तेज हो गई थी। उन्होंने कहा था कि जहां पहले ₹1500 का बिजली बिल आता था, वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद वही बिल ₹6000 से ₹7000 तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, प्रीपेड मीटर में रिचार्ज कराने के बावजूद 10 से 12 घंटे तक बिजली बहाल नहीं होती थी, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के लगातार संघर्ष, जन आंदोलन और प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दबाव में सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा।

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