उत्तर प्रदेश, राजनीति

खुद को मृत घोषित करने के लिए बर्खास्त सिपाही ने बुजुर्ग को जिंदा जलाया, फिर ऐसे खुला राज

खुद को मृत घोषित करने के लिए बर्खास्त सिपाही ने बुजुर्ग को जिंदा जलाया, फिर ऐसे खुला राज

हाथरस: हाथरस जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जेल जाने से बचने के लिए हत्यारोपी बर्खास्त सिपाही ने अपनी मौत की झूठी कहानी रच दी। अपना आधार कार्ड, मोबाइल सहित अन्य डॉक्यूमेंट एक व्यक्ति की जेब में रखकर उसे जिंदा जला कर मार डाला। हालांकि, जिंदा जलाते वक्त आरोपी सिपाही भी बुरी तरह झुलस गया। दो दिन तक चोरी-छिपे हाथरस जिला अस्पताल में अपना इलाज कराता रहा, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

उधर, शव मिलने और अधजले आधार कार्ड को देखते हुए पहले तो पुलिस ने सिपाही को मृत मान लिया। लेकिन, रेलवे स्टेशन पर दिखने वाले एक भिखारी के अचानक गायब होने पर शक हुआ। पुलिस ने सिपाही के गांव में पता लगाया। इसी दौरान जिला अस्पताल में सिपाही के नाम के गंभीर रूप से झुलसे हुए व्यक्ति के भर्ती होने की सूचना मिली। इस पर पुलिस अलर्ट हुई। जांच-पड़ताल की तो पता चला कि सिपाही जिंदा है और मरने वाला रेलवे स्टेशन के आसपास एरिया में दिखने वाला भिखारी है।

मैनपुरी का रहने वाला है आरोपी सिपाही

पुलिस के अनुसार, सिपाही ने 12 मार्च को वारदात को अंजाम दिया था। उसकी साजिश के बारे में पता चलने के बाद पुलिस उसके ठीक होने का इंतजार कर रही थी। सैफई मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होने के बाद उसे बुधवार को अरेस्ट किया गया। आरोपी सिपाही की पहचान मैनपुरी के बघौनी गांव के रामवीर सिंह (55) के रूप में हुई है। उसे 2013 में यूपी पुलिस से बर्खास्त किया गया था। उस पर ड्यूटी के दौरान हत्या समेत 13 मुकदमे दर्ज थे।

जीआरपी प्रभारी सुयश सिंह ने बताया कि रामवीर सिंह यूपी पुलिस का सिपाही था लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से उसे बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्तगी के बाद वह फरार चल रहा था। पुलिस को उसकी तलाश थी। गिरफ्तारी और जेल से बचने के लिए उसने साजिश रची। वह एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढ़ रहा था, जिसका कोई जानने वाला न हो।

पूछताछ में सिपाही ने कबूला जुर्म

जीआरपी इंस्पेक्टर सुयश सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपी बर्खास्त सिपाही ने अपना जुर्म कबूल लिया है। वह भिखारी को जलाकर खुद को मृतक घोषित कराना चाहता था। अगर पुलिस उसकी कहानी सच मान ली होती तो वह आरोप से कहीं और जाकर बस जाता और गिरफ्तारी से बच जाता।

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