बरेली: बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर बुधवार (01 मार्च) को छात्र उग्र हो गए। विवाद इतना बढ़ा कि नौबत हाथापाई और मारपीट तक जा पहुंच गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने प्रिंसिपल ऑफिस का घेराव कर जमकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालना पड़ा।
दरअसल, यह पूरा विवाद चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे द्वारा फेसबुक पर की गई एक पोस्ट से शुरू हुआ। नवरात्रि के दौरान उन्होंने एक महिला साध्वी को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था, “केवल baba’j ही थोड़े सेक्सी होते है, babi’s कम सेक्सी नहीं होते है।” इस टिप्पणी के सार्वजनिक होते ही छात्रों और धार्मिक संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया।

कार्यालय में घुसे कार्यकर्ता
आज एबीवीपी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में प्रिंसिपल ऑफिस पहुंचे और घेराव कर नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान जब चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे वहां पहुंचे, तो छात्र आपा खो बैठे। प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की। मौके पर मौजूद प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ ने किसी तरह बीच-बचाव कर चीफ प्रॉक्टर को आक्रोशित भीड़ से बाहर निकाला।

इंदिवर सिंह चौहान बने नए चीफ प्रॉक्टर
मामले की गंभीरता और छात्रों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए प्रिंसिपल डॉ. ओमप्रकाश राय ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने आलोक खरे को पद से निष्कासित करने के आदेश जारी कर दिए। उनके स्थान पर वरिष्ठ प्रोफेसर इंदिवर सिंह चौहान को कॉलेज का नया चीफ प्रॉक्टर नियुक्त किया गया है।
वहीं, एबीवीपी ने प्रिंसिपल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि एक तरफ पूरा देश नवरात्रि में नारी शक्ति की उपासना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक जिम्मेदार शैक्षणिक पद पर बैठा व्यक्ति महिला साध्वी के प्रति ऐसी घृणित मानसिकता प्रदर्शित कर रहा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि आलोक खरे पहले भी सोशल मीडिया पर असामाजिक और आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं। कॉलेज परिसर में वे अपने कर्तव्यों के बजाय अधिकांश समय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। ऐसी हरकतों से प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा धूमिल हो रही है।

छात्रों ने की जांच की मांग
विद्यार्थी परिषद ने मांग की है कि केवल पद से हटाना काफी नहीं है, बल्कि आलोक खरे के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। ABVP ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में संतोषजनक कानूनी और प्रशासनिक कदम नहीं उठाए गए, तो वे कॉलेज परिसर में और अधिक उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।