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Shailendra Singh
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गोरक्षनाथ शोधपीठ में ‘महाकुंभ पर्व 2025’ पुस्तक का भव्य विमोचन
गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ ने कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के संरक्षण में महाकुम्भ पर्व वर्ष 2025 के अवसर पर महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक का विमोचन, कुम्भ पर व्याख्यान एवं शोध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्वोत्तर रेलवे के सेवानिवृत्त मुख्य परिचालन प्रबंधक रण विजय सिंह रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. अनुभूति दूबे एवं डॉ. कुशल नाथ मिश्र ने गोरक्षनाथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्र के स्वागत भाषण के साथ की।
इसके बाद महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का सम्पादन गोरक्षनाथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्रा तथा सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा किया गया है। शोधपीठ के डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. हर्षवर्धन सिंह एवं चिन्मयानन्द मल्ल ने सम्पादन सहयोग किया है। कुम्भ पर भारत वर्ष के विभिन्न विद्वानों के लेख को इस पुस्तक में संकलित किया गया है। इस पुस्तक में इसके प्राचीन पारंपरिक स्वरुप से लेकर आधुनिक स्वरुप तक विशेष रूप से 2025 मे आयोजित हुए कुम्भ के वैदेशिक, आर्थिक एवं तकनीकी पक्षों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
राष्ट्रीय एकता एवं समाज का समन्वय है कुंभ का उद्देश्य
मुख्य अतिथि रण विजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक कुम्भके धार्मिक पक्ष, आर्थिक पक्ष एवं सांस्कृतिक पक्ष पर प्रकाश डालती है। कुम्भ के सभी पक्षों को यह पुस्तक छूती है। उन्होंने कहा कि हम समन्वयकारी संस्कृति के पोषक है। समन्वय कैसे प्राप्त हो इसके सूत्र हमारी संस्कृति देती है। भौगोलिक सीमाएं किसी राष्ट्र का निर्माण नहीं करती सांस्कृतिक समन्वय से किसी राष्ट्र का निर्माण होता है। हर कुम्भ मे देश के एक छोर से दूसरे छोर के लोग आते-जाते हैं। कुम्भ का इसीलिए आयोजन होता है कि देश के लोग एक-दूसरे को जानें। कुम्भ का सबसे बड़ा उद्देश्य है राष्ट्रीय एकता एवं समाज का समन्वय।
वहीं, कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक हमारे लिए धरोहर है। इस पुस्तक में धार्मिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक, सामाजिक आदि सभी पक्ष समाहित है। इस पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद होना चाहिए, जिससे यह विदेशियों के लिए भी उपलब्ध हो सके। शोधपीठ शोध के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। जल्द ही इसमें पी. एच. डी. करने की भी सुविधा प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह एवं वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. हर्षवर्धन सिंह द्वारा मुख्य वक्ता एवं समस्त श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस कार्यक्रम में अनेक विश्वविद्यालय से आये हुए वक्ता, विद्वान, प्रतिभागी एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय के सभी संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण डॉ. कुलदीपक शुक्ल, डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार, चिन्मयानन्द मल्ल एवं शोध-छात्र आदि उपस्थित रहे।



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