रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के करीबी और उनके पैरोकार यूसुफ मलिक को रामपुर जेल प्रशासन ने मुलाकात की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जेल सुपरिटेंडेंट की इस कार्रवाई से नाराज मलिक ने प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली और इसे “ज्यादती” और “खुलेआम बदमाशी” करार दिया।
यूसुफ मलिक ने कहा कि वह आजम खान के मुकदमों की पैरवी कर रहे हैं और ऐसे में उनसे मुलाकात को रोकना न्याय के काम में रुकावट डालने जैसा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जेल प्रशासन अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मुलाकात से रोक रहा है। मलिक ने आरोप लगाया कि यह जेलर की खुलेआम गुंडागर्दी है। रामपुर के जेलर की बहुत बड़ी बदमाशी है कि उन्होंने मुझे आजम साहब से मुलाकात नहीं करने दी।
किस मामले में जेल में हैं आजम खान?
सपा नेता आजम खान फिलहाल पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस केस में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला 2019 में दर्ज हुआ था, जब तत्कालीन विधायक आकाश सक्सेना ने शिकायत की थी कि अब्दुल्ला आज़म ने दो अलग-अलग जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए। जांच और सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया। फैसले के बाद आकाश सक्सेना ने इसे सत्य की जीत बताया था।
वहीं, अब मुलाकात से रोके जाने के बाद यूसुफ मलिक द्वारा उठाया गया मुद्दा न केवल न्यायिक प्रक्रिया, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। मलिक का दावा है कि जेल प्रशासन जान-बूझकर आजम खान को मानसिक और कानूनी रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वह केवल अपने मुवक्किल से मुकदमों पर चर्चा करना चाहते थे। इस पूरे घटनाक्रम ने रामपुर जेल प्रशासन के कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में संभव है कि यह मामला अदालत और राजनीतिक बहस दोनों में गूंजे।