उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, देश-दुनिया, राजनीति, रोजगार

फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे?, रोजगार देने पर फोकस करें सरकारें: सुप्रीम कोर्ट

फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे?, रोजगार देने पर फोकस करें सरकारें: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 फरवरी) को फ्रीबीज कल्चर (मुफ्त की रेवड़ियां) पर सवाल उठाया है। अदालत ने कहा कि अगर सरकार लोगों को सुबह से शाम तक फ्री खाना, गैस और बिजली देती रहेगी तो लोग काम क्यों करेंगे? ऐसे तो काम करने की आदत खत्म हो जाएगी। सरकार को रोजगार देने पर फोकस करना चाहिए। गरीबों की मदद करना समझ में आता है, लेकिन बिना फर्क किए सबको मुफ्त सुविधा देना सही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इसमें कंज्यूमर्स की फाइनेंशियल हालत की परवाह किए बिना सभी को फ्री बिजली देने का प्रस्ताव था। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि देश के ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे में हैं और फिर भी वे विकास को नजरअंदाज करते हुए मुफ्त की घोषणाएं कर रहे हैं।

CJI सूर्यकांत के 3 कमेंट

आपको लोगों के लिए रोजगार के रास्ते बनाने चाहिए, ताकि वे कमा सकें और अपनी इज्जत और आत्म सम्मान बनाए रख सकें। जब उन्हें एक ही जगह से सबकुछ मुफ्त मिल जाएगा तो लोग काम क्यों करेंगे। क्या हम ऐसा ही देश बनाना चाहते हैं?

अचानक चुनाव के आस-पास स्कीम क्यों अनाउंस की जाती हैं? अब समय आ गया है कि सभी पॉलिटिकल पार्टियां, नेता फिर से सोचें। अगर हम इस तरह से उदारता दिखाते रहे तो हम देश के डेवलपमेंट में रुकावट डालेंगे। एक बैलेंस होना चाहिए। ऐसा कब तक चलेगा?

हम भारत में कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं? यह समझ में आता है कि कल्याणकारी योजना के तहत आप उन लोगों को राहत दें, जो बिजली का बिल नहीं चुका सकते। जो लोग भुगतान करने में सक्षम हैं और जो नहीं हैं, उनके बीच कोई फर्क किए बिना मुफ्त सुविधा देना क्या तुष्टीकरण की नीति नहीं है?

अब समझिए पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कंपनी ने 2024 के विद्युत संशोधन नियमों के नियम 23 को चुनौती दी है। इसमें उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को हर दो-महीने में लगभग 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली देती है, बिना किसी शर्त के यानी उपभोक्ता चाहे कितना भी खर्च करे, पहली 100 यूनिट के लिए बिल नहीं देना होता।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि बिजली दरों की घोषणा के बाद तमिलनाडु की कंपनी ने अचानक मुफ्त बिजली देने का फैसला क्यों किया?

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *