UP: छठ महापर्व के दूसरे दिन सभी शहरों में बेदी तैयार, खरना पूजा संग शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत

UP: छठ महापर्व के दूसरे दिन सभी शहरों में बेदी तैयार, खरना पूजा संग शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत

प्रयागराज/वाराणसी/कानपुर: छठ महापर्व के दूसरे दिन यानी रविवार को खरना पूजा के बाद से 36 घंटे का व्रत शुरू हो जाएगा। वहीं, आज नदियों और तालाबों के घाटों पर छठी माता की आराधना करने के लिए चिह्नित स्थान की गोबर से लिपाई की और पूजा की बेदी बनाई गई। रंगोली से घाट सजाए गए। छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि समर्पण, पहचान और संस्कृति है।

वाराणसी और कई अन्य शहरों के बाजारों में फल, सब्जियां और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। काशी के घाट पर महिलाओं ने सुबह के समय बेदी बनाई। इसके बाद पूजा-अर्चना की। अस्सी घाट पर छठी माता की आराधना करने के लिए चिह्नित स्थान की गोबर से लिपाई की गई। साथ ही पूजा की बेदी भी बनाई गई।

25 अक्‍टूबर से छठ महापर्व की शुरुआत

25 अक्टूबर से महापर्व छठ पूजा की शुरुआत हो गई है। 4 दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। छठ पूजा सूर्य देव (भगवान भास्कर) और उनकी बहन छठी मइया (ऊषा देवी) की उपासना के लिए की जाती है। सूर्य जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं, जबकि छठी मइया संतान, समृद्धि और कल्याण की देवी मानी जाती हैं।

कब है छठ पूजा?

25 अक्टूबर- नहाय खाय

26 अक्टूबर- खरना

27 अक्टूबर- डूबते सूर्य को अर्घ्‍य

28 अक्टूबर- उगते सूर्य को अर्घ्य

यह पर्व क्यों है खास?

  • चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में ना पंडित होते हैं और ना मंत्र। इसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को प्रणाम किया जाता है।
  • गरीब हो या अमीर, अगड़ा हो या पिछड़ा, यह पर्व हमें सबको बराबर का बना देता है। सब एक ही घाट और तलाब किनारे सटकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। तब ना कोई छोटा होता है ना बड़ा।
  • प्रसाद बिना भेदभाव के सब एक-दूसरे का खाते और खिलाते हैं। प्रसाद में वो सब होता है, जिसका सीजन अभी है। जो सबको इजली मिल जाता है। जैसे- ठेकुआ, केला, सिंघाड़ा, नाशपाती, सेब, डाभ नींबू, शरीफा, शकरकंद, सुथनी, मूली, अदरक और हल्दी का हरा पौधा।
  • आस्था ऐसी कि बिना बोले हर कोई जो मिला वही काम करता है। कोई सड़क पर झाड़ू लगा रहा है तो कोई घाट की सफाई। कोई रंगाई-पोताई।

छठ पर्व में किस दिन क्या होता है?

  • पहला दिन- नहाय खाय। इसमें घर की सफाई, फिर स्नान और शाकाहारी भोजन से व्रत की शुरुआत होती है।
  • दूसरा दिन- व्रती दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे खरना कहा जाता है।
  • तीसरा दिन- छठ का प्रसाद बनाता है। प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लड्डू और चढ़ावे के रूप में फल आदि होता है। शाम को बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और तालाब या नदी किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
  • चौथा दिन- कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। व्रतधारी दोबारा वहीं जाते हैं, जहां शाम को अर्घ्य दिया था।

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