नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार (04 दिसंबर) को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि अगले एक साल में हाईवे पर मौजूदा टोल वसूली सिस्टम खत्म हो जाएगा। उसकी जगह पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक, बैरियर लैस टोल सिस्टम लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए सिस्टम की शुरुआत फिलहाल 10 जगह की जा चुकी है और इसे एक साल के भीतर पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य है।
गडकरी ने बताया कि इस समय देशभर में लगभग 4,500 हाईवे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है। पहले टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुककर नकद या कार्ड से भुगतान करना पड़ता था। FASTag आया तो गाड़ियों का टोल पर रुकने का समय कम हुआ। अब अगला कदम बिना बैरियर वाले हाईटेक टोल की तरफ है।
अब टोल पर रुकने की जरूरत नहीं, पैसे अपने आप कट जाते हैं
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) प्रोग्राम बनाया है। ये पूरे देश के लिए एक जैसा और आपस में जुड़ा इलेक्ट्रॉनिक टोल प्लेटफॉर्म है। इसका मकसद अलग-अलग हाईवे पर अलग सिस्टम की परेशानी खत्म करना और एक ही तकनीक से आसानी से टोल वसूली करना है।
इस NETC सिस्टम का मुख्य हिस्सा FASTag है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक वाला टैग होता है और गाड़ी के सामने वाले शीशे (विंडस्क्रीन) पर चिपकाया जाता है। जैसे ही गाड़ी टोल लेन से गुजरती है, सेंसर इस इस टैग को रीड कर लेता है और यूजर के लिंक्ड बैंक खाते या वॉलेट से पैसा कट जाता है।
बैरियर लैस टोल कैसे काम करेगा?
सरकार अब FASTag के साथ ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) जैसी तकनीक जोड़कर बैरियर लैस टोलिंग लागू कर रही है, ताकि गाड़ियों को टोल के लिए रुकना ही न पड़े। ANPR कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पहचानते हैं और FASTag रीडर टैग पढ़कर टोल की रकम वसूल कर लेते हैं। पूरी प्रक्रिया कुछ सेकेंड में अपने आप हो जाती है।
इस सिस्टम के तहत टोल प्लाजा पर भारी बैरियर, लंबी कतारें और कैश देने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। जिन वाहनों के पास वैध FASTag नहीं होगा या जो नियम तोड़ेंगे, उन्हें ई-नोटिस और जुर्माने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जैसे FASTag सस्पेंड करना या VAHAN डेटा पर पेनल्टी लगाना।