नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बुधवार को अहम आदेश पारित किया है। अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों से जुड़े मामले में कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को कंपनियों से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में निष्पक्ष और तटस्थ जांच करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल थे।
उन्होंने CBI और ED से चार सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। पीठ ने टिप्पणी की कि जांच शुरू करने में एजेंसियों को पहले ही समय लग चुका है। कोर्ट ने ईडी को निर्देश दिया कि वह वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर एडीजीए और अन्य संबंधित पक्षों की जांच करे। साथ ही, अनिल अंबानी और ADAG की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं मुकुल रोहतगी और श्याम दीवान की पेशी का संज्ञान लेते हुए उन्हें जनहित याचिका (PIL) पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
अनिल अंबान अदालत की अनुमति के बिना नहीं जाएंगे विदेश
सुनवाई के दौरान रोहतगी ने उस मांग का विरोध किया जिसमें अदालत से अनिल अंबानी के देश छोड़ने पर रोक लगाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था। उन्होंने पीठ को आश्वासन दिया कि अनिल अंबानी भारत में ही रहेंगे और अदालत की अनुमति के बिना विदेश नहीं जाएंगे। उधर, जांच एजेंसियों की ओर से पेश तुषार मेहता ने बताया कि संबंधित व्यक्ति के विदेश जाने से रोकने के लिए विभिन्न लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी हैं।
अदालत ने दिया आखिरी अवसर
इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई और ईडी को सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। 18 नवंबर को पीठ ने केंद्र सरकार, CBI, ED, अनिल अंबानी और रिलायंस ADAG को नोटिस जारी किया था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पक्षकारों को पेश होकर जवाब दाखिल करने का आखिरी अवसर दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ईएएस सरमा द्वारा दायर PIL में आरोप लगाया गया है कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ADAG की कई इकाइयों में सार्वजनिक धन की सुनियोजित हेराफेरी, वित्तीय विवरणों की कथित गढ़ंत और संस्थागत स्तर पर मिलीभगत हुई।