नई दिल्ली: देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (20 जनवरी) को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। अदालत ने कहा कि पिछली सुनवाई की टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं। कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि कोर्ट निजी पक्षों की दलीलें पूरी करके आज ही सुनवाई खत्म करना चाहती है। इसके बाद राज्यों को एक दिन का मौका दिया जाएगा। आज की सुनवाई में पीड़ितों की ओर से एडवोकेट हर्ष जैदका, डॉग लवर्स/एनजीओ की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण, मेनका गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन दलीलें दीं गईं।
मामले में अगली सुनवाई 28 जनवरी को
जस्टिस नाथ (एमिकस से) ने पूछा कि क्या आपकी नोट तैयार हो गई है? इस पर एमिकस क्यूरी (वकील गौरव अग्रवाल) ने कहा कि अभी 7 राज्यों की जानकारी आनी बाकी है। इसके बाद बेंच ने आदेश देते हुए कहा कि व्यक्तियों और एनजीओ की ओर से दलीलें पूरी हो चुकी हैं। मामला 28 जनवरी को दोपहर 2 बजे लिस्ट किया जाए। उस दिन अदालत एमिकस क्यूरी, एनएचआरसी (NHRC) के वकील और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की दलीलें सुनेगी।