नई दिल्ली: बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR (सामान्य शब्दों में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन) पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह हटाए गए वोटर्स को लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए फिजिकली के अलावा ऑनलाइन आवेदन की अनुमति भी दे। इसके अलावा बिहार SIR की समय सीमा बढ़ाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर भारी प्रतिक्रिया आती है तो डेडलाइन बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग आधार कार्ड के अलावा दूसरे दस्तावेजों पर जोर दे रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आधार कार्ड सहित फॉर्म 6 में दिए गए 11 दस्तावेज में से कोई भी जमा किया जा सकता है, इनमें ड्राइविंग लाइसेंस, पासबुक, पानी का बिल जैसे डॉक्यूमेंट शामिल हैं। कोर्ट ने दोहराया कि लोगों को अपना नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए बिहार आने की जरूरत नहीं है, वे ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पार्टियों से पूछा- आप क्या कर रहे हैं?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, राजनीतिक दलों की निष्क्रियता हैरान करने वाली है। राज्य की 12 पॉलिटिकल पार्टियों में से यहां मात्र 3 पार्टियां ही कोर्ट में आई हैं। वोटर्स की मदद के लिए आप क्या कर रहे हैं? कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि राजनीतिक दलों के लगभग 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट होने के बावजूद, उनकी ओर से केवल दो आपत्तियां ही आई हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा, पार्टियां बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) नियुक्त करने के बाद क्या कर रही हैं? लोगों तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच इतनी दूरी क्यों है? पार्टियों को वोटर्स की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य के 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अदालती कार्यवाही में पक्षकार बनाएं।
चुनाव अधिकारी हटाए गए मतदाताओं के आवेदन जमा करने वाले राजनीतिक पार्टियों के बूथ लेवल एजेंट्स को एक पावती (रसीद) दें।
सभी राजनीतिक पार्टियां अगली सुनवाई में उन क्लेम फॉर्म्स पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें, जिसे जमा करने में उन्होंने वोटर्स की मदद की थी।
चुनाव आयोग और याचिकाकर्ताओं की दलीलें
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि 65 लाख हटाए गए नामों में से 22 लाख मृत पाए गए हैं और 8 लाख डुप्लिकेट हैं। उन्होंने कहा कि लोग अगर खुद आगे आते हैं तो उनके दावों की जांच की जाएगी। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहा और खुद ही दिक्कतें पैदा कर रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी आरजेडी ने सिर्फ आधे निर्वाचन क्षेत्रों में ही BLA तैनात किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी 12 राजनीतिक दलों को इस फैसले की जानकारी देने और कोर्ट में पेश होकर एक स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वे इस मामले पर अपनी नजर बनाए रखेंगे।