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अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विवि में पहला स्थान पाने पर डॉ. शौविक और दूसरा स्थान पर रहे डॉ. संयमिता और डॉ. वरुण को भी किया गया सम्मानित
बरेली: एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज और एसआरएमएस कॉलेज ऑफ नर्सिंग के 12वें दीक्षांत समारोह में 427 विद्यार्थियों को उपाधियां और प्रशस्ति पत्र प्रदान की गईं। श्रेष्ठ शैक्षिक प्रदर्शन करने वाले मेडिकल, पैरामेडिकल और नर्सिंग के 59 विद्यार्थियों को ट्रॉफी के साथ सर्टिफिकेट मिले। पीजी में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर रेडिएशन ओंकोलॉजी की डॉ. संयमिता जैन और एमबीबीएस में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले 2019-2024 बैच छात्र डॉ. करण कालरा ओवरऑल टॉपर चुने गए।
डॉ. संयमिता ने एमडी रेडिएशन ओंकोलॉजी ब्रांच में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विवि में भी दूसरा स्थान हासिल किया। दोनों को श्रीराम मूर्ति गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र के साथ 51000- 51000 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हेल्थ रिसर्च विभाग के सेक्रेटरी एवं इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डीजी डॉ. राजीव बहल शामिल हुए। उन्होंने दीक्षांत भाषण विद्यार्थियों ईमानदारी, सम्मान, प्रतिबद्धता, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूती से थामे रखने का संदेश दिया।

स्वास्थ्य क्षेत्र महत्वपूर्ण और सम्मानित पेशा: डॉ. राजीव बहल
एसआरएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के शतिक प्रेक्षागृह में शनिवार (4 अक्टूबर) को सरस्वती वंदना, संस्थान गीत के साथ दीक्षांत समारोह आरंभ हुआ। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति ने दीक्षांत समारोह के आरंभ होने की घोषणा की। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला ने विद्यार्थियों को दीक्षा दी और एनएमसी की भी शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि डॉ. राजीव बहल ने दीक्षांत भाषण में स्वास्थ्य क्षेत्र को महत्वपूर्ण और सम्मानित पेशा बताया और इसमें शामिल होने पर विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। विद्यार्थियों को ईमानदारी का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आज डिग्री आपके हाथ में है और यह आपकी सफलता का उत्सव है। इसमें आपके माता पिता का संघर्ष और भाई बहनों का सहयोग व भरोसा भी छिपा हुआ है।
उन्होंने कहा, डिग्री मिलने के बाद आज पढ़ने की आपकी यात्रा समाप्त नहीं हुई, बल्कि सही मायने में आज वह आरंभ हुई है। यह पेशा जीवन भर सीखने और विनम्रता से मरीजों की सेवा का है। डॉ. बहल ने मानवता को सर्वाधिक महत्व देते हुए इसे चिकित्सकीय पेशे के लिए सबसे महत्वपूर्ण आदर्श बताया। कहा कि आज के बाद आपका दुनिया में प्रवेश होगा। यहां ईमानदारी, सम्मान, प्रतिबद्धता, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूती से थामे रखें। इसके लिए उन्होंने टिप्स भी दिए और अपनी जड़ों को संजोने, अपने गुरुओं का सम्मान करने और प्रेम से सेवा करने का भी संदेश दिया।
यह सपना ही था, जो संकल्प के जरिए पूरा हुआ: देव मूर्ति
एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज का दिन डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए यादगार दिन है। अपने मां-बाप का सम्मान करें, जिनकी बदौलत आप यहां तक पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों को बेटे का पिता के प्रति प्यार और संकल्प को मेडिकल कॉलेज के जरिए समझाया। कहा कि वर्ष 1988 में जब मेरे पूज्य बाबू जी बीमार थे और उन्हें दिल्ली ले जाना पड़ा। तभी उन्होंने बरेली में मेडिकल कॉलेज की स्थापना का संकल्प लिया, जिससे किसी भी बेटे को अपने पिता के इलाज के लिए बरेली से बाहर न ले जाना पड़े। यह सपना ही था, जो संकल्प के जरिये पूरा हुआ।

विद्यार्थियों को सेवा भाव से मरीज का इलाज करने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने चिकित्सक को मरीज के इलाज के लिए चुना है। ऐसा करते समय डॉक्टर खुद को भगवान समझ लेते हैं और मरीजों के प्रति उनका व्यवहार खराब हो जाता है। याद रहे डॉक्टर भगवान नहीं है, वह भी आम इंसान ही है। ऐसे में सेवा भाव से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना ही चिकित्सकीय पेशे का सबसे बड़ा धर्म है।
मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने किया सभी का स्वागत
इससे पहले दीक्षांत समारोह के आरंभ में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एमएस बुटोला ने अतिथियों के साथ विद्यार्थियों और उनके परिजनों का स्वागत किया। उन्होंने ट्रस्ट की उपलब्धियों और इसके द्वारा संचालित सामाजिक कार्यों और योजनाओं की जानकारी दी और मेडिकल कॉलेज की स्थापना से लेकर अब तक की उपलब्धियों को बताया। अंत में वाइस प्रिंसिपल डॉ. रोहित शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया और सभी का आभार जताया। दीक्षांत समारोह का संचालन डॉ. आयुषि शुक्ला और डॉ. शिवांगी मिधा ने किया।

इस मौके पर नवाबगंज के विधायक डॉ. एमपी आर्या, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन, डॉ. योगेश प्रसाद, बरेली कालेज के प्राचार्य डॉ. ओपी राय, डॉ. वंदना शर्मा, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष दिनेश दद्दा, एसआरएमएस के सेक्रेटरी आदित्य मूर्ति, ट्रस्टी आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, देविशा मूर्ति, ट्रस्ट एडवाइजर इंजीनियर सुभाष मेहरा, श्रीराम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य डॉ. जसप्रीत कौर, श्रीराम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. मुत्थू महेश्वरी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह, डीन यूजी डॉ. बिंदु गर्ग, सदस्य बोर्ड ऑफ गर्वनर, श्रीराम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्राचार्य प्रो. प्रभाकर गुप्ता, श्रीराम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के डीन डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. निर्मल यादव, प्लेसमेंट सेल के डायरेक्टर डॉ. अनुज कुमार, मेडिकल कॉलेज के डीएसडब्ल्यू डॉ. क्रांति कुमार, सभी महाविद्यालयों के विभागाध्यक्ष व फैकल्टी मौजूद रहे।
इन विद्यार्थियों को मिला पदक, प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार
दीक्षांत समारोह में 427 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसमें एमडी व एमएस के 66 विद्यार्थी, एमएससी नर्सिंग के 5, एमएससी पैरामेडिकल के 36, एमबीबीएस के 99, नर्सिंग बीएससी के 106 और पैरामेडिकल के 119 विद्यार्थी शामिल रहे। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विवि में एमडी जनरल मेडिसिन ब्रांच में पहला स्थान पाने वाले डॉ. शौविक दत्ता और एमडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन में दूसरा स्थान पाने पर डॉ. वरुण गुप्ता को भी दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया गया। दीक्षांत में छह मेधावी विद्यार्थियों ने गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र के साथ 11 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। विभिन्न विषयों में टॉप करने पर एमबीबीएस 2019- 2024 बैच के 25 विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति पत्र मिला।
बीएससी नर्सिंग में सर्वाधिक अंक लाने पर हिमांशी (बैच 2019-2023) और रूपिंदर कौर (बैच 2020-2024) ने श्रीमती चंचल मेहरोत्रा गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र के साथ 11 हजार रुपये का नकद पुरस्कार हासिल किया। एमएससी में सर्वाधिक अंक पाने वाली पैरामेडिकल की छात्रा सपना (बैच 2020), नंदिनी तिवारी (बैच 2021) और महक नाज (बैच 2022) ने भी श्रीराम मूर्ति गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र के साथ 11 हजार रुपये का नकद पुरस्कार हासिल किया। बीएससी में सर्वाधिक अंक पाने वाली पैरामेडिकल के छात्र सुशील कुमार को भी श्रीराम मूर्ति गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र के साथ 11 हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिला।