Prayagraj: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि दो पढ़े-लिखे बालिगों के बीच लंबे समय तक कायम शारीरिक संबंध, शादी का वायदा पूरा न करने का अपराध नहीं है। ऐसे में आपराधिक केस जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने याची के खिलाफ आपराधिक केस कार्रवाई, चार्जशीट,समन का आदेश रद कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने बस्ती कोतवाली के श्याम बहादुर यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आदित्य गुप्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता ने बहस की। कोर्ट ने कहा स्वीकृत तथ्य है कि पीड़िता व आरोपी दोनों 2016 से एक दूसरे को जानते हैं। 2019 से शादी के वायदे पर शारीरिक संबंध बनाए। परिवार शादी को राजी था। 2019 से 2025 तक संबंध कायम रहा। 2020 में दो बार गर्भपात भी कराया।
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का दिया हवाला
पीड़िता जिला अस्पताल में डाटा एक्जक्यूटिव है और याची अंबेडकर नगर मेडिकल कॉलेज में जूनियर क्लर्क हो गया है। कोर्ट ने कहा शारीरिक संबंध सहमति से था या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि लंबे समय तक शारीरिक संबंध कायम रखा है, तो अवधारणा सहमति की होगी। बाद में शादी से इनकार से बलात्कार का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने एफआईआर में यह तथ्य नहीं दिया कि वह तलाकशुदा महिला है। जो तथ्य है उसके आधार पर सजा की उम्मीद कम है। हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया।