Jhansi Hospital Fire: झांसी के सरकारी मेडिकल कॉलेज में हुए अग्निकांड की पहली जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। दो सदस्यीय कमेटी ने माना है कि अग्निकांड एक हादसा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्विच बोर्ड में शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगी। नर्स ने बोर्ड को जमीन पर गिराकर पैर से आग बुझाने का प्रयास किया। इससे नर्स का पैर झुलस गया। इसके बाद और स्टाफ आया। उसने भी 3 मिनट तक आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैल गई।
इधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने यूपी के मुख्य सचिव और DGP को नोटिस भेजा है। 7 दिन के अंदर अग्निकांड की रिपोर्ट मांगी है। अग्निकांड के तीन दिन बाद कृपाराम का नवजात बेटा मिल गया है। महोबा निवासी लक्ष्मी उसे ले गई थी। बेटा समझकर उसका पालन कर रही थी। प्रशासन ने जांच के बाद कृपाराम को बेटा सौंप दिया।
कैसे हुआ हादसा?
शुक्रवार रात करीब साढ़े 10 बजे ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में स्पार्किंग के चलते आग लगी, फिर धमाका हो गया। पूरे वार्ड में आग फैल गई। वार्ड बॉय ने आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) चलाया, मगर वह 4 साल पहले ही एक्सपायर हो चुका था, इसलिए काम नहीं किया। सूचना पर फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां पहुंचीं। खिड़की तोड़कर पानी की बाैछारें मारीं। भीषण आग को देखते हुए सेना को बुलाया गया। करीब 2 घंटे में आग पर काबू पाया गया। वार्ड की खिड़की तोड़कर 39 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
आज लखनऊ से आएगी जांच टीम
शासन ने चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक किंजल सिंह की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय टीम बनाई है। यह टीम सोमवार को झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचेगी। इसे सात दिन में रिपोर्ट देनी है। टीम में स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, अपर निदेशक विद्युत एवं अग्निशमन महानिदेशक की ओर से नामित अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी आग लगने के कारणों और लापरवाही की जांच करेगी। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटना न हो, इसके लिए उपाय तलाशे जाएंगे।