तेल अवीव/तेहरान: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का रविवार (08 मार्च) को नौवां दिन है। इस बीच इजराइल ने ईरान में तेल भंडार से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइली मीडिया वाइनेट के अनुसार, ईरान के 30 फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो को निशाना बनाया गया है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह हार मान ले। ट्रम्प ने कहा कि इसका मतलब है कि ईरान लड़ाई जारी रखने की स्थिति में न रहे और अंत में आत्मसमर्पण कर दे। उन्होंने कहा कि या तो ईरान खुद सरेंडर करे या उसकी सैन्य ताकत इतनी कमजोर कर दी जाए कि वह लड़ने के लायक ही न बचे।
ईरानी सेना ने अमेरिका को दी धमकी
दूसरी ओर, ईरानी सेना ने शनिवार को अमेरिका को धमकी दी है कि अगर उसके जहाज फारस खाड़ी में आए, तो उन्हें समुद्र में डुबो दिया जाएगा। ईरान का ये बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि अमेरिकी नौसेना जल्द ही ऑयल टैंकरों को सुरक्षा लिए फारस की खाड़ी में जहाज भेज सकती है। ये टैंकर आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं।
जंग के बड़े अपडेट्स
- ईरान में अब तक 6,668 सिविल इलाकों को निशाना बनाया गया है।
- इन हमलों में 5,535 घरों और 1041 दुकानें को नुकसान पहुंचा।
- 14 मेडिकल सेंटर्स और 65 स्कूलों पर भी हमला किया गया।
- US-इजराइल और ईरान जंग में अब तक 1483 मौत हुई है।
- रेड क्रिसेंट के 13 सेंटर भी हमलों का शिकार हुए।
- जंग में अब तक इजराइल के 1765 लोग घायल हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप बोले– ईरान अब दबंग नहीं, बल्कि लूजर बन गया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के सामने झुक गया है। उन्होंने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और वादा किया है कि अब उन पर हमला नहीं करेगा। उनके मुताबिक ऐसा अमेरिका और इजराइल के लगातार हमलों के दबाव की वजह से हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान अब मिडिल ईस्ट का दबंग नहीं, बल्कि ‘लूजर’ बन गया है। यह हालात तब तक रह सकते हैं जब तक ईरान सरेंडर न कर दे या पूरी तरह कमजोर न हो जाए।
दरअसल, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल ही में अपने पड़ोसी देशों पर हमले के लिए माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि अब पड़ोसी देशों पर तब तक हमले नहीं किए जाएंगे, जब तक कि उन देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला न किया जाए।