नई दिल्ली/मुंबई/कोलकाता: इंडिगो ऑपरेशन संकट के बीच रविवार शाम तक Airline ने यात्रियों को 610 करोड़ रुपये का रिफंड कर दिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ये भी जानकारी दी है कि कंपनी ने देशभर में यात्रियों के 3 हजार से ज्यादा बैगेज भी लौटाए हैं। मंत्रालय ने बताया कि रिफंड या री-बुकिंग पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाएगा। यात्रियों की मदद के लिए स्पेशल सपोर्ट सेल बनाए गए हैं। इसके साथ ही इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन में भी तेजी आई है। डोमेस्टिक फ्लाइट फुल कैपेसिटी के साथ उड़ान भर रही हैं।
इंडिगो के CEO ने पीटर एल्बर्स ने बताया कि आज हम 138 में से 137 डेस्टिनेशंस पर 1650 फ्लाइट ऑपरेट कर रहे हैं। ऑन टाइम परफॉर्मेंस (OTP) 75% रहने का अनुमान है। शनिवार को यह आंकड़ा 1500 था। आमतौर पर एयरलाइन रोजाना करीब 2300 उड़ानें ऑपरेट करती है। हमारी सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं।
आज भी इंडिगो की 650 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल
आज भी इंडिगो की 650 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हुई हैं। इनमें दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, हैदराबाद, भोपाल, मुंबई, त्रिची से जाने वाली फ्लाइट्स शामिल हैं। इससे पहले एयरलाइन ने शुक्रवार को लगभग 1600 फ्लाइट और शनिवार को लगभग 800 फ्लाइट कैंसिल की थीं।
रविवार को कोलकाता के नेताजी सुभाषचंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर IndiGo की 76 उड़ानें रद्द हुईं हैं। इनमें 53 फ्लाइट उड़ान भरने वालीं और 23 फ्लाइट लैंड होने वालीं कैंसिल हुई हैं।
चिदंबरम बोले- जब तक एयरलाइन सेक्टर में दो कंपनियों का दबदबा, तब तक किराया नियंत्रण जरूरी
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने रविवार को कहा- जब तक एयरलाइन सेक्टर में सिर्फ दो कंपनियां हावी हैं, तब तक हवाई किरायों पर यह रोक जारी रहनी चाहिए। उन्होंने X पोस्ट में लिखा- ‘मुझे खुशी है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अब जाकर इकोनॉमी क्लास के किरायों को सीमित किया है। जब तक एयरलाइन सेक्टर में कॉम्पिटिशन नहीं बढ़ता, जनता की सेफ्टी के लिए कीमतों को सीमित करना ही उपाय है।’
उन्होंने यह भी कहा कि IndiGo में हुई गड़बड़ी और देशभर के एयरपोर्ट्स पर मची अफरा-तफरी दिखाती है कि IndiGo प्रबंधन, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, DGCA और सरकार, सब अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे। उन्होंने बताया कि पायलट ड्यूटी टाइम के नए नियम जनवरी 2024 के थे, लेकिन 23 महीनों में सरकार एयरलाइन को इन नियमों के मुताबिक काम करने में मदद नहीं कर सकी। जब संकट बढ़ा, सरकार कुछ कर नहीं पाई और अंत में हार मान ली।