उत्तर प्रदेश, राजनीति

वाराणसी में KIA कार एजेंसी दिलाने के नाम पर फ्रॉड, नौ साइबर ठगों पर पहली बार लगा गैंगस्टर  

वाराणसी में KIA कार एजेंसी दिलाने के नाम पर फ्रॉड, नौ साइबर ठगों पर पहली बार लगा गैंगस्टर  

वाराणसी: वाराणसी में कैंट थाना प्रभारी की तहरीर पर जिला जेल में निरुद्ध सात साइबर जालसाजों के ऊपर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। इन सभी ने मिलकर फ्राड दस्तावेजों के सहारे जून, 2024 में तेजस्वी शुक्ला नामक व्यक्ति को KIA कार एजेंसी दिलाने के नाम पर 72 लाख रुपये ठगे थे।

इस मामले में भेलूपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने सभी नौ साइबर जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस गिरोह का मास्टरमाइंड प्रियरंजन कुमार निवासी नालंदा बिहार का रहने वाला है। यह एक गिरोह चलाता है जो लोगों के साथ साइबर फ्राड करता है। ऐसे में विवेचना के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

कैंट थाने पर भेजा गया था गैंगचार्ट

कैंट इंस्पेक्टर राज कुमार शर्मा ने बताया कि जून, 2024 में भेलूपुर थाने में तेजस्वी शुक्ला ने 72 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे में साइबर क्राइम, एसओजी और वाराणसी पुलिस ने मिलकर जालसाजों की धर पकड़ शुरू की थी। पुलिस टीम ने इस प्रकरण में 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिनका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। भेलूपुर पुलिस द्वारा इन सभी अपराधियों का गैंगचार्ट थाने में भेजा गया था।

कैंट इंस्पेक्टर ने बताया कि इस गैंग चार्ट में अभियुक्त प्रियरंजन निवासी नालंदा बिहार, प्रभाकर निवासी नालंदा, हिमांशु राज निवासी नालंदा, आलोक कुमार निवासी नालंदा, दीपक कुमार निवासी नालंदा, सत्येंद्र सुमन निवासी नालंदा, सौरव कुमार निवासी नालंदा, रमेश सिंह भूटोला, निवासी नालंदा और रंजन कुमार निवासी नालंदा बिहार के ऊपर गैंगस्टर की कार्रवाई के लिए गैंग चार्ट भेजा गया था। इसकी विवेचना और तथ्यों के अवलोकन में यह पता चला कि प्रियरंजन मास्टरमाइंड है, जो बिहार से लेकर झारखण्ड, यूपी और दिल्ली के लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाता है। उसके सतह ये सभी लोग बराबर के हिस्सेदार हैं।

रसूखदार और सफेदपोश हैं सभी

कैंट थाना प्रभारी राज कुमार शर्मा ने बताया कि पुलिस की विवेचना में यह सामने आया है कि ये सफेदपोश और रसूखदार हैं। ऐसे में इनके भय और आतंक के डर से कोई इनके खिलाफ हिम्मत नहीं रखता। ऐसे में गैंगचार्ट बनाया गया है। इसपर कार्रवाई करते हुए सभी के ऊपर उत्तर प्रदेश गिरोबंद अधिनियम 1986 की धारा 3(1) में एफआईआर करते हुए कार्रवाई की गई है।

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