लखनऊ: उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग (RTO) में अवैध वसूली के सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। शासन ने रायबरेली के एआरटीओ (प्रवर्तन) अंबुज और फतेहपुर की एआरटीओ (प्रवर्तन) पुष्पांजलि मित्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर ओवरलोडिंग को संरक्षण देने और अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाने के गंभीर आरोप हैं। लखनऊ के एआरटीओ राजीव कुमार बंसल, रायबरेली के एआरटीओ अंबुज और फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा को मुख्यालय से संबद्ध कर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। मामले की जांच झांसी के उप परिवहन आयुक्त केडी सिंह गौर को सौंपी गई है।
बीते नवंबर में एसटीएफ ने मौरंग, गिट्टी, बालू के ओवरलोड ट्रकों को रिश्वत लेकर पास कराने के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। मामले में लखनऊ के मड़ियांव, रायबरेली के लालगंज और उन्नाव में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें वाहनों को पास कराने के खेल में शामिल 25 लोगों को नामजद किया गया था। इनमें एआरटीओ प्रवर्तन फतेहपुर पुष्पांजलि मित्रा गौतम, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी, एआरटीओ रायबरेली अंबुज, पीटीओ रेहाना, एआरटीओ लखनऊ राजीव कुमार बंसल और दलाल विनोद को भी आरोपी बनाया गया था।
मेडिकल पर थे लखनऊ एआरटीओ, खारिज हो गई थी बेल
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद से नामजद अधिकारियों व कर्मचारियों ने कार्यालय आना बंद कर दिया था। 48 दिन बाद परिवहन विभाग के विशेष सचिव केपी सिंह की ओर से जारी आदेश में लखनऊ के एआरटीओ प्रवर्तन राजीव कुमार बंसल, रायबरेली के अंबुज और फतेहपुर की पुष्पांजलि मित्रा को निलंबित कर दिया गया है।
लखनऊ के एआरटीओ राजीव कुमार बंसल एफआईआर के बाद से गायब हैं। उनका मोबाइल बंद है। वह स्वास्थ्य कारणों को वजह बताते हुए छुट्टी पर हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जो खारिज हो गई थी। ओवरलोड वाहनों से वसूली के मामले में परिवहन विभाग के अफसरों की सुस्ती पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।