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लखनऊ में CM आवास के पास लगी होर्डिंग, लिखा- ‘चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए’

लखनऊ में CM आवास के पास लगी होर्डिंग, लिखा- 'चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार जारी है। राजधानी में समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर सोमवार को लगी होर्डिंग ने जहां सरकारी स्कूलों के मर्जर पर सरकार को घेरा तो वहीं, उसके जवाब में अब मुख्यमंत्री आवास के पास लगी होर्डिंग चर्चा में आ गई है।

इस होर्डिंग में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए लिखा गया- “चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए।” इसके साथ ही योगी सरकार के आठ सालों की शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का विस्तार से जिक्र किया गया है।

सपा नेता की होर्डिंग से शुरू हुई बहस

सोमवार सुबह सपा दफ्तर के बाहर सपा नेता जयसिंह प्रताप यादव (जनपद अमेठी) की ओर से लगाई गई होर्डिंग लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। होर्डिंग में लिखा था- “ये कैसा रामराज्य? बंद करो पाठशाला, खोलो मधुशाला!” यह हमला सरकारी स्कूलों के मर्जर को लेकर था, जिसे विपक्ष गरीब बच्चों के शिक्षा अधिकार पर हमला बता रहा है।

लखनऊ में CM आवास के पास लगी होर्डिंग, लिखा- 'चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए'

CM आवास के पास लगी जवाबी होर्डिंग

इस पोस्टर के जवाब में मुख्यमंत्री आवास के पास जो होर्डिंग लगाई गई उसमें 2017 के बाद शिक्षा में हुए सुधारों की झलक दी गई। होर्डिंग में लिखा है- “ज्यों-ज्यों बढ़ते गए वर्ष, स्कूलों का होता गया उत्कर्ष”। नीचे योगी सरकार की 8 वर्षों की उपलब्धियों का ब्योरा दिया गया।

लखनऊ में CM आवास के पास लगी होर्डिंग, लिखा- 'चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए'

  • 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय
  • 57 जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय
  • गोरखपुर में पूर्वांचल का पहला सैनिक स्कूल
  • 680 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण
  • 39 नए हाईस्कूल और 14 इंटर कॉलेज का निर्माण
  • 25,784 स्कूलों में स्मार्ट क्लास, 5,568 ICT लैब्स
  • 7 नए केंद्रीय विद्यालय प्रक्रियाधीन
  • 93 से बढ़कर 120 आश्रम पद्धति विद्यालय और सर्वोदय विद्यालय

लखनऊ में CM आवास के पास लगी होर्डिंग, लिखा- 'चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए'

कम संख्या वाले सरकारी स्कूलों को मर्ज कर रही सरकार

राज्य सरकार ने हाल ही में छात्र संख्या के आधार पर 5000 से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क है कि “कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मर्ज कर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाएगा और बच्चों को बेहतर शिक्षा व सुविधाएं मिलेंगी।” लेकिन विपक्ष इसे शिक्षा पर हमला और सरकारी स्कूलों को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश बता रहा है।

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