बरेली: शहर में अपने घर में नमाज पढ़ने पर पुलिस की ओर से रोक लगाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के शीर्ष अधिकारियों से जवाब तलब किया। दोनों अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए? अब अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने रिट याचिका संख्या 5646/2026 (तारिक खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) की सुनवाई करते हुए बरेली के डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने दी चेतावनी
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी 23 मार्च को उपस्थित नहीं हुए, तो उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा सकता है।
मोहम्मदगंज गांव के एक मकान में लोग जुमा की नमाज अदा करते हैं। इसका वीडियो सामने आया तो पुलिस ने रोक लगाते हुए नमाज पढ़ने वालों का चालान कर दिया। घर में जुमा की नमाज होने से नाराज होकर अपने घर के बाहर मकान बिकाऊ है का स्लोगन लिख दिया। इन्हें घर में नमाज पढ़ने पर ऐतराज है।
मकान मालिक ने कहा- बुलडोजर चलवाने की धमकी मिली
दो महीने पहले 16 जनवरी को जिस मकान में नमाज पढ़ी गई थी, उस मकान के मालिक हसीन खान ने सुनवाई के दौरान खुली अदालत में बयान दर्ज कराया। हसीन खान ने आरोप लगाते हुए कहा, उस दिन मैं अपने घर में परिवार के साथ नमाज पढ़ रहा था, तभी पुलिस मुझे उठाकर ले गई और चालान कर दिया।
बाद में आरिफ प्रधान और मुख्तयार ने मुझे धमकाया कि अगर कोर्ट में उनके मुताबिक नहीं बोला तो घर पर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस वालों ने उन्हें गांव के बाहर घेरकर एक लिखित कागज पर अंगूठा लगवा लिया, जिसे वह पढ़ नहीं सके क्योंकि वह अनपढ़ हैं।
कोर्ट ने पूछा– नमाज के लिए ली गई थी अनुमति?
अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी से सीधा सवाल किया कि क्या 16 जनवरी को हसीन खान की निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने के लिए कोई अनुमति मांगी गई थी? कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब 23 मार्च, 2026 को दोपहर 2:00 बजे अंतिम आदेश के लिए तारीख तय की है।
हाईकोर्ट ने कहा- सुरक्षा में चूक पर राज्य जिम्मेदार
हसीन खान ने अपनी और परिवार की जान को खतरा बताया। इस पर हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से उन्हें 24/7 सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि दो सशस्त्र गार्ड हमेशा हसीन खान के साथ रहेंगे।
पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि यदि हसीन खान या उनकी संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचता है, तो प्रथम दृष्टया इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार माना जाएगा। इस आदेश की प्रति तत्काल एडवोकेट जनरल कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सुरक्षा आज से ही सुनिश्चित की जा सके।
बता दें कि बरेली पुलिस ने 16 जनवरी को बिना अनुमति के मकान में नमाज पढ़ने के आरोप में 12 लोगों का चालान किया था।