नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission) ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए 334 ऐसे राजनीतिक दलों (RUPP) का पंजीकरण निरस्त कर दिया, जो सिर्फ कागजों पर मौजूद थे। ये दल साल 2019 के बाद से किसी भी चुनाव- लोकसभा, विधानसभा या उपचुना में हिस्सा नहीं ले रहे थे और न ही इनके दफ्तरों का कोई वास्तविक पता मिल सका। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आयोग का यह कदम राजनीतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
Cleaning up the Electoral System: ECI Delists 334 RUPPs
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— Election Commission of India (@ECISVEEP) August 9, 2025
क्या हैं RUPP और क्यों हुई कार्रवाई?
RUPP (Registered Unrecognised Political Parties) वे राजनीतिक दल हैं, जो चुनाव आयोग में पंजीकृत तो होते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय या राज्य स्तर की मान्यता नहीं मिली होती। ऐसे दलों को टैक्स छूट जैसे कुछ फायदे मिलते हैं। देश में कुल 2,854 RUPP थे, जिनमें से अब सिर्फ 2,520 बचे हैं।
आयोग ने इन 334 दलों को इसलिए हटाया क्योंकि:
2019 के बाद से इन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा।
इनके दफ्तरों का कोई वास्तविक पता नहीं मिला।
कुछ दल पहले ही आयकर नियमों और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों का उल्लंघन कर चुके थे।
पंजीकरण रद्द करने के नियम क्या हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग किसी दल की ‘मान्यता’ तो नहीं रद्द कर सकता, लेकिन उसे पंजीकृत दलों की सूची से हटा सकता है (डीलिस्ट कर सकता है)। नियमों के मुताबिक, अगर कोई पंजीकृत दल लगातार 6 साल तक किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेता, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। हालांकि, ये दल नई प्रक्रिया के तहत दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।