Diwali 2025: आज यानी 20 अक्टूबर को पूरे देश में प्रकाश पर्व दिवाली मनाई जा रही है। यह कार्तिक माह की अमावस्या तिथि है। इस दिन घरों से लेकर मंदिरों में लक्ष्मी पूजन का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। साथ ही व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि होती है। सभी के मन में यह सवाल जरूर होगा कि लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है? आइये भागवत प्रभाकर ज्योतिषाचार्य वास्तु शास्त्री आचार्य राजेंद्र तिवारी से जानतें हैं आज पूजन का मुहूर्त किस प्रकार रहेगा।
दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (Diwali 2025 Laxmi Pujan Muhurat)
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-व्यापारी अपने प्रतिष्ठान में या तो मकर लग्न में करें; समय दिन में 12 बजकर 58 से 02 बजकर 41 तक। या फिर अभिजीत मुहूर्त में करें; समय 11 बजकर 43 से 12 बजकर 28 तक।
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घर में पूजन का समय; वृषभ लग्न सायंकाल 07 बजकर 09 से 09 बजकर 05 तक साधक साधना करें। सिंह लग्न रात्रि 01:41 से 03:58 तक; इस दौरान अपने गुरु मंत्र का जाप, इष्ट मंत्र का जाप या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। मां भगवती की विशेष कृपा बनेगी।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि (Diwali Lakshmi Puja Vidhi)
दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा की जाती है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन से पहले घर की अच्छे साफ-सफाई करें। घर में शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें। घर के मुख्य द्वार और पूजाघर के पास रंगोली बनाएं। दिवाली पूजन के लिए पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। फिर इस पर माता लक्ष्मी, गणेश भगवान, राम दरबार और कुबेर देव की प्रतिमा की स्थापना करें।
अपनी इच्छानुसार भगवान की कैसी भी प्रतिमा रख सकते हैं
ध्यान रहे कि लक्ष्मी जी की मूर्ति को श्री गणेश के दाहिने हाथ की तरफ स्थापित करना चाहिए। पूजा के लिये कुछ लोग सोने की मूर्ति रखते हैं, कुछ चांदी की, तो कुछ लोग मिट्टी की मूर्ति या फिर तस्वीर से भी पूजा करते हैं। आप अपनी इच्छानुसार भगवान की कैसी भी प्रतिमा रख सकते हैं। मूर्ति स्थापना के बाद पूजा स्थल को फूलों से सजाएं। साथ ही पूजा के लिये कलश या लोटा उत्तर दिशा की तरफ रखें और दीपक को आग्नेय कोण, यानि दक्षिण-पूर्व की तरफ रखें। चौकी के पास ही जल से भरा एक कलश भी रखें। आपने धनतेरस पर जो सामान खरीदा है उसे भी पूजा स्थल पर जरूर रखें। पूजा में फल-फूल और मिठाई के साथ ही पान, सुपारी, लौंग इलायची और कमलगट्टे भी रखें। अब भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं और एक घी का दीपक जला लें।
जल, मौली, हल्दी, अबीर-गुलाल, चावल, फल, गुड़ आदि से विधि विधान पूजा करें और माता महालक्ष्मी की स्तुति करें। अंत में माता लक्ष्मी, गणेश जी और भगवान विष्णु की आरती करें और प्रसाद सभी में बांट दें। इसके बाद घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें। वहीं घर के मंदिर में एक घी का बड़ा दीपक और दूसरा सरसों के तेल का बड़ा दीपक जरूर रखें। ध्यान रहे कि ये दीपक पूरी रात जलते रहना चाहिए।
दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए (Diwali Par Kitne Diya Jalaye)
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-दिवाली पर कम से कम 13 या 26 छोटे दीपक जलाने चाहिए। साथ में दो बड़े दीपक भी जलाने चाहिए।