बरेली: बेहद आम हो गई डायबिटीज के मरीज आज हर घर में मौजूद हैं। असंतुलित जीवनशैली और बिगड़ती खानपान की आदतों की वजह से युवा और बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह खतरनाक रोग धीरे-धीरे शरीर को खोखला कर देता है। ब्लड में शुगर की अधिक मात्रा किडनी, आंखों, पैर की नसों को सर्वाधिक प्रभावित करती है। दिल पर भी इसका असर होता है, जो हार्ट अटैक की आशंका बढ़ाता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है।
हालांकि, ऐसी स्थित डायबिटीज के प्रति लापरवाही बरतने पर ही सामने आती है। ऐसी स्थिति होने पर इन बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाता है। इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन हर वर्ष 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाता है। आज इसी मौके पर करते हैं डायबिटीज पर चर्चा…
इन लक्षणों की न करें अनदेखी
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग प्रमुख प्रोफेसर (डॉ.) स्मिता गुप्ता कहती हैं कि अगर आप हर समय थकान महसूस करते हैं, आपको बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है, प्यास ज्यादा लगती है, सिरदर्द बना रहता है, आंखों की रोशनी कम हो रही है, चिड़चिड़ापन रहता है या मौसम बदलने पर आप ज्यादातर बीमार हो जाते हैं, तो इन लक्षणों की अनदेखी न करें। यह शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने की वजह भी हो सकते हैं, जिसे आम भाषा में डायबिटीज कहते हैं। ब्लड शुगर बढ़ने पर किडनी रक्त से अतिरिक्त शुगर फिल्टर नहीं कर पाती, इससे बार-बार पेशाब जाना पड़ता है।

डॉ. स्मिता गुप्ता, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज
इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और प्यास ज्यादा लगती है। ज्यादा शुगर आंखों में जमने लगती है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है और सिरदर्द की समस्या भी जन्म लेती है। शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। घावों को भरने में समय लगता है और संक्रमण से लड़ने की ताकत भी खत्म हो जाती है। इसी वजह से मौसम के साधारण बदलाव में भी सर्दी, खांसी, बुखार हो जाता है। साधारण से लगने वाले इन लक्षणों की अनदेखी शरीर के अंगों पर प्रभाव डाल कर गंभीर बीमारियों में बदल सकती है।
पारिवारिक हिस्ट्री भी हो सकती है वजह
डॉ. स्मिता के अनुसार पारिवारिक हिस्ट्री के साथ ही असंतुलित खानपान, अनियमित जीवनशैली, हार्मोन्स असंतुलन डायबिटीज की दूसरी मुख्य वजहें हैं। ऐसे में डायबिटीज को नियंत्रित करना ही ज्यादा समझदारी का काम है। स्वस्थ व्यक्ति के ब्लड में शुगर का स्तर भोजन से पहले या खाली पेट 80-130 मिग्रा/डीएल के बीच और भोजन के दो घंटे बाद 180 मिग्रा/डीएल से कम होना चाहिए। इसमें असंतुलन डायबिटीज होना बताता है। असंतुलित होने पर यह स्तर 500 मिग्रा/डीएल या इससे भी अधिक हो सकता है। डायबिटीज के इलाज के लिए एसआरएमएस में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में डीएम एंडोक्राइनोलाजी डॉ. श्रुति शर्मा कहती हैं कि हमारे शरीर में पेंक्रियाज ग्रंथि इंसुलिन और ग्लूकान हार्मोन बनाती है, जिनमें से इंसुलिन ब्लड के जरिए शरीर के सभी अंगों में शुगर पहुंचाने का काम करती है। इसी शुगर से सेल्स को एनर्जी मिलती है। जब पेनक्रियाज में इंसुलिन कम बनता है तो कोशिकाओं तक शुगर ठीक से नहीं पहुंच पाती, जिससे सेल्स की एनर्जी कम होने लगती है और शरीर में दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इंसुलिन कम होने से ब्लड में शुगर जमा होने लगती है और डायबिटीज रोगी को बार-बार पेशाब जाना पड़ता है। ऐसे में सभी लोगों को समय-समय पर ग्लूकोज की जांच जरूर करानी चाहिए, क्योंकि इससे पता चलता है कि उन्हें शुगर नियंत्रित है या नहीं।
किडनी पर पड़ता है डायबिटीज का असर
डायबिटीज के मरीजों के लिए यह बेहद जरूरी है। डायबिटीज का किडनी पर काफी असर पड़ता है। नियमित जांच से रोगी को किडनी की समस्या से दूर रखना संभव है। ब्लड में शुगर की खराब मात्रा कोलेस्ट्राल का स्तर असंतुलित करती है। यहीं से हार्ट संबंधी दिक्कतें शुरू होती हैं। डायबिटीज रोगियों में हाई ब्लड प्रेशर होने से हृदय रोग, हृदयाघात, किडनी व आंखों की समस्या भी हो सकती है। लंबे समय तक ब्लड में ग्लूकोज का स्तर ज्यादा रहने का असर आंखों के रेटिना पर भी होता है। रेटिना का समय पर इलाज न होना आंखों की रोशनी भी छीन सकता है।

डॉ. श्रुति शर्मा, डीएम एंडोक्रिनोलॉजी, मेडिसिन विभाग, एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज
डॉ. श्रुति कहती हैं कि डायबिटीज का इलाज सिर्फ किसी दवा पर निर्भर नहीं है। यह लाइफस्टाइल और खानपान से जुड़ा रोग है और यह दोनों बदलकर ही काबू में रखा जा सकता है। विशेष रूप से कम संतृप्त वसा वाला आहार लेकर आप डायबिटीज को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके लिए भोजन में फाइबरयुक्त सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पादों और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। मिठाई या चीनी और फास्टफूड से परहेज के साथ शारीरिक श्रम, व्यायाम को प्राथमिकता भी इसके नियंत्रण के लिए जरूरी है।
खतरनाक होता जा रहा है डायबिटीज
दुनिया भर में 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिनमें से अकेले भारत में यह संख्या बहुत अधिक है। अनुमानों के अनुसार, अगले 25 वर्षों में भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़कर 14 करोड़ से अधिक हो सकती है। डायबिटीज का लाइलाज होना इसे और भी गंभीर बनाता है। आज असंतुलित खानपान और अनियमित जीवनशैली वाले युवा और बच्चे भविष्य के डायबिटीज होगी हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को आज से ही सावधान होकर अपनी खानपान की आदतों को ठीक करना और दिनचर्या को नियमित करना ज्यादा जरूरी है।
डायबिटीज के मुख्य लक्षण
थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, अधिक पेशाब आना, हृदय रोग, मानसिक समस्याएं, वजन कम होना, भूख न लगना, बार बार चश्मे का नंबर बदलना, पैरों में घाव ठीक न होना या गैंगरीन होना डायबिटीज के मुख्य लक्षण हैं।
ऐसे करें डायबिटीज से बचाव
डायबिटीज पीड़ित व्यक्ति को दूसरी बीमारियों से बचने के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर के निर्देश पर ली जा रही दवाइयों के साथ जीवन शैली में बदलाव के साथ इन सावधानियों को अपना कर डायबिटीज को काबू में रखा जा सकता है।
- खाने में मीठे का पूरी तरह परहेज करें या बेहद कम सेवन करें।
- आलू, चावल जैसे कार्बोहाइट्रेट वाला भोजन करने से बचें।
- फाइबर और प्रोटीन की मात्रा भोजन में ज्यादा रखें।
- शुगर को नियंत्रित रखें और नियमित रूप से शुगर और आंखों की जांच कराएं।
- वजन को नियंत्रित रखने के लिए नियमित व्यायाम, योग एक्सरसाइज करें।
- नियमित रूप से सुबह शाम तेजी से टहलें।
- विटामिन डी की कमी डायबिटीज का खतरा बढ़ाती है। इसकी कमी न होने दें।
एसआरएमएस में नि:शुल्क मैटाबोलिक डिजीज स्क्रीनिंग कैंप 14 को
विश्व डायबिटीज दिवस पर 14 नवंबर को एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग की ओर से नि:शुल्क मैटाबोलिक डिजीज स्क्रीनिंग कैंप आयोजित हो रहा है। मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. स्मिता गुप्ता ने कहा कि इस कैंप में एचबीए1सी, डीएससी, बीएमडी, एलएफटी, लिपिड प्रोफाइल, सीरम क्रिटिनिन, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, न्यूरोपैथी टेस्ट और माइक्रोएल्बोमिनयूरिया की नि:शुल्क जांच की जाएगी।