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अयोध्या राम मंदिर होगी 70 नए पुजारियों की भर्ती, अब यहां भी होंगे नियमित दर्शन

अयोध्या राम मंदिर होगी 70 नए पुजारियों की भर्ती, अब यहां भी होंगे नियमित दर्शन

अयोध्‍या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और मंदिर परिसर के विस्तार को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। मंदिर परिसर के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए 70 नए पुजारियों की भर्ती की जाएगी। यह फैसला 13 दिसंबर को मणिराम छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में हुई ट्रस्ट की कार्यकारी बैठक में लिया गया है।

जून, 2025 में शेषावतार और परकोटे (मंदिर की बाहरी घेराबंदी) में स्थित छह अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न हो चुका है। वर्तमान में यहाँ केवल सीमित समय के लिए ही पट खुलते हैं। श्रद्धालुओं के लिए इन मंदिरों के द्वार नियमित रूप से खुले रखने के लिए अतिरिक्त पुजारियों की अनिवार्य आवश्यकता है।

पुजारियों का तैनाती विवरण

वर्तमान में मंदिर में कुल 20 पुजारी कार्यरत हैं। नई भर्ती के बाद व्यवस्था को इस प्रकार विभाजित किया जाएगा:

रामलला व राम दरबार    मुख्य टीम     सुबह-शाम की रोटेशनल शिफ्ट

परकोटे के 6 मंदिर व शेषावतार       42 पुजारी      तीन शिफ्ट (8-8 घंटे की ड्यूटी)

सप्त मंडपम व कुबेर टीला      08 पुजारी      सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक

कुल नई आवश्यकता   50+ पुजारी    (भर्ती का लक्ष्य 70 रखा गया है)

बदला गया ड्यूटी का फॉर्मूला (Roster System)

ट्रस्ट ने पुजारियों की ड्यूटी के लिए पुराने रोस्टर फॉर्मूले को संशोधित किया है:

तिथि आधारित बदलाव: पहले ड्यूटी अंग्रेजी कैलेंडर (1-15 और 16-30 तारीख) के अनुसार बदलती थी, लेकिन अब इसे हिंदी तिथि (अमावस्या और पूर्णिमा) के अनुसार बदला जाएगा।

रोटेशन: रामलला की पूजा करने वाली टीम अगले पखवाड़े राम दरबार में सेवा देगी, जिससे सभी पुजारियों को मुख्य विग्रह की सेवा का अवसर मिले।

आरती का समय: मुख्य मंदिर में मंगला आरती से शयन आरती तक निरंतर मौजूदगी रहेगी, जबकि अन्य मंदिरों में श्रृंगार आरती से शयन आरती तक का क्रम चलेगा।

पिछला अनुभव और नई तैयारी

इससे पूर्व ट्रस्ट ने पुजारी प्रशिक्षण योजना के तहत 24 पुजारियों को प्रशिक्षित किया था, जिनमें से वर्तमान में 20 सेवा दे रहे हैं। अब ट्रस्ट इन रिक्तियों को भरकर एक ठोस ढांचा तैयार करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में किसी भी विशेष उत्सव या भारी भीड़ के दौरान पूजा-पद्धति में कोई व्यवधान न आए।

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