जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटने से बाढ़, पत्थर और मिट्टी से घर-दुकानें हुईं बर्बाद

जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटने से बाढ़, पत्थर और मिट्टी से घर-दुकानें हुईं बर्बाद

नई दिल्‍ली: जम्मू-कश्मीर के डोडा में मंगलवार को ऊपरी इलाके में बादल फटने से बाढ़ आ गई। पहाड़ों से पत्थर और मलबा गिरने से घर और दुकानों को नुकसान पहुंचा है। सड़कों पर कई गाड़ियां मलबे में दब गईं।

वहीं, महाराष्ट्र के कई जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है। मुंबई में पिछले 48 घंटे में करीब 15 इंच (380 मिमी) बारिश दर्ज की गई। IMD ने मंगलवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मुंबई के सभी सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में पानी भरा

नासिक में भी आज सभी स्कूल और कॉलेज बंद हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर और महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में शामिल सप्तश्रृंगी मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आज बंद रहेंगे।

सूरत में 24 घंटे की बारिश से कई सड़कें डूबीं

गुजरात के सूरत में पिछले 24 घंटे से हो रही भारी बारिश के बाद शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। सूरत-नवसारी स्टेट हाईवे पर भी जलभराव हो गया, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। वहीं, मगदल्ला रोड भी पानी में डूब गई।

बादल फटने पर कम समय में होती है भारी बारिश

मौसम विज्ञान के अनुसार, यदि किसी छोटे इलाके में एक घंटे के भीतर 10 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश हो जाए, तो इसे बादल फटना कहा जाता है।

बादल क्यों और कैसे फटता है?

  • जब नमी से भरे बादल किसी पहाड़ी क्षेत्र से टकराते हैं, तो वे तेजी से ऊपर उठते हैं।
  • ऊंचाई पर तापमान कम होने से जलवाष्प तेजी से पानी की बूंदों में बदल जाती है।
  • एक ही जगह बड़ी मात्रा में पानी की बूंदें इकड्डी होकर आपस में मिल जाती हैं।
  • इससे बादल में पानी का भार बढ़ जाता है और वह अधिक देर तक पानी रोक नहीं पाता।
  • नतीजतन, एक छोटे इलाके में अचानक मूसलाधार बारिश होने लगती है।

यह घटना कहां ज्यादा होती?

  • बादल फटने की घटनाएं सबसे ज्यादा हिमालयी और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में होती हैं।
  • आमतौर पर यह घटना 12 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर बने बादलों में होती है।
  • पहाड़ों से टकराने के कारण बादल आगे नहीं बढ़ पाते और एक ही स्थान पर भारी मात्रा में पानी गिरा देते हैं।

इसका असर क्या होता है

  • अचानक बाढ़
  • भूस्खलन
  • नदियों और नालों का उफान
  • सड़कों, पुलों और मकानों को नुकसान
  • जन-धन की हानि।

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