गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, नागरिकता नियम में हुआ संशोधन; अब नया नियम लागू

गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, नागरिकता नियम में हुआ संशोधन; अब नया नियम लागू

नई दिल्‍ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता नियम, 2009 में अहम संशोधन करते हुए एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इस संशोधन के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले नागरिकता आवेदकों के लिए पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस कदम को नागरिकता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए प्रावधानों के मुताबिक, नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले इन तीन देशों के आवेदकों को अब अपने पासपोर्ट से संबंधित विस्तृत जानकारी देना जरूरी होगा। इसमें पहचान, यात्रा इतिहास और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन शामिल होगा। गृह मंत्रालय का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य नागरिकता प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोकना है।

15 दिन के अंदर सरेंडर करना होगा पासपोर्ट

नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि नागरिकता को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर आवेदकों को अपना विदेशी पासपोर्ट सरेंडर करना होगा। आवेदकों को संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट या सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट को अपना पासपोर्ट सौंपने की लिखित सहमति देनी होगी।

नया नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो जाएगा। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस संशोधन के बारे में बात करते हुए इसे एक ‘प्रशासनिक स्पष्टीकरण’ बताया है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकता से जुड़े मामलों में वेरिफिकेशन (सत्यापन) और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को ज्यादा मजबूत बनाना है।

किन देशों के आवेदकों पर लागू होगा नियम?

यह संशोधन विशेष रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले आवेदकों पर लागू होगा। इन देशों के नागरिक यदि भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें नए नियमों का पालन करना होगा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे आवेदकों की पहचान और उनकी पृष्ठभूमि की बेहतर जांच संभव होगी। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नागरिकता केवल उन्हीं लोगों को मिले जो सभी कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं।

नागरिकता प्रक्रिया होगी और सख्त

इस संशोधन के बाद नागरिकता प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त और विस्तृत हो जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। इससे देश की आंतरिक सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ई-OCI (e-OCI) और ऑनलाइन प्रक्रिया को भी बढ़ावा

आपको बता दें कि इसी महीने की शुरुआत में भी गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को नोटिफाई किया था। इसके तहत कई अन्य अहम बदलाव किए गए थे:
पेपरलेस पहचानः इलेक्ट्रॉनिक ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (e-OCI) कार्ड की शुरुआत की गई है और आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है।

सख्त नियमः नाबालिगों के लिए दोहरे पासपोर्ट के नियमों को ज्यादा सख्त किया गया है। फिजिकल और कागजी प्रक्रियाओं को खत्म करते हुए ई-OCI कार्ड जारी करने का रास्ता साफ हुआ है, जो प्रवासी भारतीयों के लिए ‘पेपरलेस पहचान’ की दिशा में बड़ा कदम है।

बायोमेट्रिक डेटा: अब आवेदकों को अपना बायोमेट्रिक डेटा शेयर करने के लिए भी सहमति देनी होगी, ताकि उन्हें फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनाया जा सके और भविष्य में ऑटोमैटिक एनरोलमेंट की सुविधा मिल सके।

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