PM Modi: नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती

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PM Modi: महिला आरक्षण बिल को लेकर इन दिनों देश की सियासत गरम है। इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित किया जिसमें उन्होंने इस अहम मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण, उनकी सियासत में भागीदारी और पार्लियामेंट में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। साथ ही, विपक्ष पर भी निशाना साधा। जानें पीएम मोदी ने क्या कहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आज मैं अपनी बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं। आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पास नहीं हो पाया। मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों से क्षमाप्रार्थी हूं।’

विपक्ष ने नारी हित का प्रस्ताव गिरा दियामोदी

पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष ने नारी हित का प्रस्ताव गिरा दिया। विपक्ष ने महिलाओं के सपनों को कुचल दिया। मैं देश की महिलाओं से माफी मांगता हूं। नारी सबकुछ भूल जाती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं भूलती है। विपक्ष को मैं कहना चाहता हूं कि 21वीं सदी की नारी हर घटना पर नजर रख रही है और सच्चाई भी भली-भांति जान रही है। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है। लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दलहित सब कुछ हो जाता है, दलहित देशहित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति को, देशहित को, इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।’

कांग्रेस, सपा और टीएमसी को सजा जरूर मिलेगी

प्रधानमंत्री मोदी बोले कि इस बिल से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम सभी राज्यों को शक्ति मिलती। कांग्रेस, सपा और टीएमसी को सजा जरूर मिलेगी। उन्होंने महिला आरक्षण बिल को समर्थन नहीं देकर पाप किया है। ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं। महिला आरक्षण समय की मांग है। हमारे ईमानदार प्रयास की विपक्ष ने भ्रूण हत्या कर दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया, वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर, उसके आत्मसम्मान पर चोट थी।

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