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राज्यपाल की अध्यक्षता में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक सम्पन्न
लखनऊ: प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान विश्वविद्यालय के प्रशासन, वित्तीय स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति, प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों की स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही वाणिज्य, फार्मेसी, इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, विधि, सामाजिक विज्ञान, कला एवं मानविकी तथा विज्ञान संकायों की शैक्षणिक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
भावी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से विचार–विमर्श
बैठक में छात्रावास सुविधाएं, छात्र कल्याण (बालक एवं बालिका), नवाचार एवं इन्क्यूबेशन, विभिन्न शोध पीठों, संग्रहालय, आर्ट गैलरी, समझौता ज्ञापन (एमओयू) एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त एनएसएस/एनसीसी के अंतर्गत विस्तार गतिविधियां, सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियां, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल की कार्यप्रणाली पर भी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। बैठक में ‘समर्थ’ पोर्टल के क्रियान्वयन, शोध गतिविधियों, विभिन्न परियोजनाओं, प्रकाशनों एवं पेटेंट्स की स्थिति की भी समीक्षा की गई। साथ ही विश्वविद्यालय की भावी कार्ययोजना (फ्यूचर प्लान) पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष अपने-अपने विभागों की कमियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करें तथा संकल्प लेकर उन्हें समयबद्ध ढंग से दूर करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग नियमित समीक्षा की प्रणाली विकसित करे और मासिक आधार पर प्रगति का आकलन सुनिश्चित किया जाए, जिससे कार्यों में निरंतर सुधार हो सके। राज्यपाल ने शोध, नवाचार एवं पेटेंट को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में किए जा रहे शोध कार्यों का व्यावहारिक उपयोग (कमर्शियलाइजेशन) सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं अध्यापकों को शोध पत्र लेखन, पुस्तक लेखन एवं अनुवाद कार्य में सक्रिय रूप से भागीदारी करने के निर्देश दिए। साथ ही अध्यापकों से अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें इन गतिविधियों में प्रशिक्षित करें तथा उनकी सहभागिता सुनिश्चित करें।
गतिविधियों का हो समुचित दस्तावेजीकरण
उन्होंने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय में वर्ष भर संचालित होने वाली गतिविधियों का समुचित दस्तावेजीकरण किया जाए तथा इसके लिए समिति बनाकर पुस्तकों का प्रकाशन कराया जाए। स्थापना दिवस सहित विभिन्न आयोजनों का भी व्यवस्थित संकलन किया जाए, जिसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो, ताकि उनके कौशल का विकास हो सके। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों को सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी आंगनबाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालयों में जाकर शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का संचालन करें, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए। उन्होंने आंगनबाड़ी किट वितरण के प्रभाव का आकलन कर उसका भी दस्तावेजीकरण करने के निर्देश दिए। साथ ही सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत बालिका गृह एवं बालक गृह में भी विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर बल देते हुए कहा कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए, खेलो इंडिया जैसी योजनाओं में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाए तथा ‘अग्निवीर’ जैसे अवसरों से जोड़ा जाए। उन्होंने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, पोषण एवं अनुशासन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए तथा छात्रावासों में स्वच्छता, पौष्टिक भोजन एवं आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर बल दिया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को नैक मूल्यांकन एवं एनआईआरएफ रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-लाइब्रेरी के सुदृढ़ीकरण तथा डिजिटल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने जनभवन में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘मूट कोर्ट’ जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय को भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक किया जाना आवश्यक है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी समीक्षा बैठक को किया संबोधित
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से प्रदेश के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं। नियमित शैक्षिक समीक्षा बैठकों, कार्यशालाओं एवं संवाद के माध्यम से राज्यपाल जी द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ अग्रणी प्रदेश बन रहा है तथा विश्वविद्यालयों के साथ-साथ महाविद्यालय भी गुणवत्ता के आधार पर उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपा के मार्गदर्शन में उच्च शिक्षा का स्तर अंतर्राष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।