Chandra Shekhar Azad: यूपी के कन्नौज में डीएम द्वारा राज्य मंत्री को कथित तौर पर इग्नोर करने का मामला सियासी रंग ले रहा है. नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कन्नौज में मंत्री असीम अरुण की अनदेखी के मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे महज लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम में गहरी बैठी मानसिकता का संकेत बताया और सरकार पर सीधे सवाल उठाए. चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ के ‘डबल इंजन’ शासन में यह घटना सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जातिगत सोच का उदाहरण है. उन्होंने लिखा कि एक मंत्री, जो खुद पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं, उन्हें मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया और फिर 45 मिनट तक इंतजार कराया गया. आजाद ने कहा कि कार्यक्रम को किसी अन्य अधिकारी के आने से जोड़ देना और मंत्री को बिना कार्यक्रम के लौटने पर मजबूर करना बेहद गंभीर है.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब संवैधानिक पदों का सम्मान भी वर्ण व्यवस्था से तय होगा. उनका बयान सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है. आजाद ने इस घटना को अलग-थलग नहीं बताया बल्कि इसे एक पैटर्न का हिस्सा बताया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बेबी रानी मौर्य के साथ भी आगरा में इसी तरह की प्रशासनिक अनदेखी देखने को मिली थी. वहां किसान बैठक बुलाई गई थी, लेकिन अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे, जिससे बैठक स्थगित करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि एक ओर मंत्री को बुलाकर इंतजार कराया जाता है और दूसरी ओर मंत्री के बुलाने पर भी अधिकारी नहीं पहुंचते. इससे साफ होता है कि कुछ ब्यूरोक्रेट्स जनप्रतिनिधियों पर हावी होते जा रहे हैं. आजाद ने यह भी सवाल किया कि आखिर यह सब किसके इशारे पर हो रहा है.
कन्नौज में राज्य मंत्री असीम अरुण जी के साथ भाजपा के “डबल इंजन” वाले मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के राज में हुआ यह व्यवहार केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर बैठी जातिगत मानसिकता का खुला प्रदर्शन है।
समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री जो खुद प्रशासनिक सेवा से आए एक… pic.twitter.com/krLxXJHkG4
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) March 27, 2026
अनुशासन और जवाबदेही पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है. मंत्री असीम अरुण ने खुद इस मामले में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई और कहा कि समयबद्धता और शिष्टाचार का पालन नहीं हुआ. उन्होंने अधिकारियों को नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से सीख लेने की सलाह दी. मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि एक लोक सेवक के तौर पर अधिकारियों को समय की गरिमा बनाए रखना चाहिए. इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है और विपक्ष सरकार को घेरने में जुट गया है.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल कन्नौज में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें मंत्री असीम अरुण को शाम 5:30 बजे मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था. मंत्री समय पर पहुंचे, लेकिन कार्यक्रम के आयोजक और वरिष्ठ अधिकारी देर से पहुंचे. एसडीएम वैशाली करीब 15 मिनट बाद पहुंचीं और अन्य अधिकारी अनुपस्थित रहे. करीब 45 मिनट तक इंतजार करने के बाद भी कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ, जिससे नाराज होकर मंत्री कार्यक्रम स्थल छोड़कर चले गए. इसे उन्होंने अपना अनादर मानते हुए डीएम को पत्र लिखा. अब इस घटना को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं.