बरेली: बहेड़ी में किसान सहकारी चीनी मिल सेमीखेड़ा अपनी पुरानी मशीनों और धीमी पेराई क्षमता की वजह से गन्ना किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। मिल में बार-बार तकनीकी खराबी आने से पेराई कार्य ठप हो रहा है। सेमीखेड़ा चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी और इसने 1984 से गन्ना पेराई शुरू की। प्रारंभ में इसकी क्षमता 1200 टीसीडी (टन केन प्रति दिन) थी, जिसे 1994-95 में बढ़ाकर 2750 टीसीडी किया गया था।
हालांकि, इसके बाद मिल का कोई बड़ा तकनीकी आधुनिकीकरण नहीं हो सका। वर्ष 2024 में 43.58 करोड़ रुपये की लागत से कुछ मरम्मत और सुधार कार्य कराए गए, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। उनके अनुसार, मिल की स्थिति सुधारने के लिए नया प्लांट लगाना आवश्यक है।
स्थायी महाप्रबंधक की तैनाती नहीं
तत्कालीन महाप्रबंधक शादाब असलम ने मिल के आधुनिकीकरण के लिए गंभीर प्रयास किए थे, लेकिन दिसंबर 2024 में उनके तबादले से पहले प्रस्ताव पर अमल नहीं हो सका। उनके तबादले के बाद से अब तक मिल में किसी स्थायी जीएम की तैनाती नहीं हुई है। वर्तमान में पूर्व चीफ केमिस्ट किशनलाल संविदा पर जीएम का दायित्व संभाल रहे हैं।
इस पेराई सत्र में भी मिल की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। मशीनों की खराब हालत के चलते इस वर्ष मात्र 35 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग तीन लाख क्विंटल कम है। 10 नवंबर को पेराई सत्र शुरू होने के बाद से जिलाधिकारी अविनाश सिंह दो बार मिल का औचक निरीक्षण कर चुके हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं। इसके बावजूद पेराई की गति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।
उपसभापति ने कहा- हालत सुधारने के प्रयास जारी
किसान सहकारी चीनी मिल सेमीखेड़ा के उपसभापति सत्यपाल गंगवार ने बताया कि मिल की हालत सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात कर ठोस समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।